धामपुर। जिले के 11 ब्लाकों में मनरेगा योजना के तहत करोड़ों खर्च होने के बाद भी हालत बदरंग ही नजर आ रही है। सरकार काफी प्रयास के बावजूद मजदूर वर्ग का पलायन रोकने में नाकाम साबित हो रही है।
बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूर वर्ग केंद्र व प्रदेश सरकार के कार्यों से आहत है। दोनों सरकारों ने मजदूर व उच्च वर्ग के जख्मों पर मरहम लगाने की जरा भी कोशिश नहीं की। गरीब परिवार को खर्च चलाना भारी पड़ा तो उसने शहरों की ओर पलायन शुरू कर दिया। केंद्र की योजना के तहत जिले की गरीबी खत्म करने के लिए मनरेगा योजना के तहत 24 करोड़ पांच लाख 29 हजार रुपये आए, जिनमें से 14 करोड़ 89 लाख 48 हजार रुपये अब तक खर्च किए गए हैं। इस धन में से 33 लाख 69 लाख हजार मेट व राजमिस्त्री पर खर्च हुआ। बावजूद इसके सरकार की 120 रुपये मनरेगा मजदूरी श्रमिकों को रास नहीं आई। शिवकुमार, थम्मन, सुहैल, राशिद, नावेद, जयचरन, चंचल आदि ने शहरों में रुख कर ही परिवार पालन पोषण करना बेहतर समझा। ग्रामीणों सुभाष सिंह, लखवीर सिंह, सुरेंद्र, रहमतुल्ला, सादिक आदि का कहना है कि सरकार की इस योजना की हकीकत वास्तविकता से परे है। उधर बीडीओ गजेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। जरूरतमंद के मांगने पर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
ब्लाक धन खर्च
अफजलगढ़ 197.95 90.5
अल्हैपुर 160.29 92.65
स्योहारा 158.19 98.47
हल्दौर 187.4 105.34
जलीलपुर 234.04 123.37
किरतपुर 170.94 115.61
कोतवाली 337.33 238.3
मुहम्मदपुर देवमल 255.25 190.1
नजीबाबाद 260.24 146.55
नहटौर 219.57 131.03
नूरपुर 224.8 157.66
नोट: सभी आंकड़े लाखों में है।