बिजनौर। परिषदीय स्कूलाें में फर्जी डिग्री के सहारे शिक्षक बन बैठे गुरुजी की धरपकड़ जारी है। सितंबर में हुए खुलासे के बाद अब दो शिक्षक और फर्जी डिग्री के मामले में फंस गए हैं। सत्यापन में दोनों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। डायट प्राचार्या सुषमा अग्रवाल ने कार्रवाई करने के लिए बीएसए को पत्र भेजा है।
फर्जी डिग्री के मामले में विशिष्ट बीटीसी 2008 बैच क ी एक शिक्षिका एवं शिक्षक और फंस गए हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान इस्माईलपुर के अनुसार विकास क्षेत्र स्योहारा की शिक्षिका मनीषा सिंह की बीए शास्त्री की डिग्री सत्यापन में फर्जी पाई गई। उन्होंने यह डिग्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से प्राप्त की थी तथा दूसरा शिक्षक नरेंद्र सिंह जलीलपुर ब्लाक में तैनात है। उसने भी इसी विवि से उत्तर मध्यमा किया था, जो डायट द्वारा सत्यापन में गलत पाए गए। डायट की प्राचार्या दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीएसए राकेश कुमार श्रीवास्तव को पत्र लिखा है।
तबादले पर सहारनपुर गई शिक्षिका
फर्जी डिग्री के मामले में फंसी स्योहारा की शिक्षिका मनीषा सिंह शासन से अगस्त के महीने में हुए अंतर जनपदीय तबादले पर सहारनपुर चली गई हैं। बताया जाता है कि शिक्षिका के प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं होने के कारण वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
पहले भी आठ की हो चुकी है सेवा समाप्त
फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी करने वाले आठ शिक्षकों की सितंबर के महीने में सेवा समाप्त हो चुकी है। जिनकी सेवा समाप्त हुई है उनमें प्रेमपुरी कुरील के शिक्षक रतन कुमार, मुस्तफाबाद गढ़ी के अनिल कुमार, रामनगर टांडा के नवीन कुमार, काजमपुर के नीरज कुमार, मुजाहिदपुर खिड़का के पंकज कुमार, फलौदी के कपिल कुमार, सलेमपुर के विनीत कुमार राय, जाफर हुसैन पुर के शिक्षक ऋषिपाल सिंह शामिल हैं।