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रेडक्रॉस का पैसा ठिकाने लागने में जुटे सीएमओ

Bijnor Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
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बिजनौर। जिले में रेडक्रॉस सोसाइटी के पैसे की जमकर बंदरबाट चल रही है। सीएमओ डा. शशि कुमार अगिभनहोत्री ने बिना टेंडर के ही जयपुर के एक एनजीओ को विकलांगों के सहायतार्थ 25 लाख का काम देने का फैसला कर लिया और इसके लिए पांच लाख का चैक भी जारी कर दिया। इसके लिए सीएमओ ने रेडक्रॉस सोसाइटी से अनुमोदन करवाना भी आवश्यक नहीं समझा।
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रेडक्रॉस सोसाइटी के कोषाध्यक्ष नरेंद्र मारवाड़ी का कहना है कि सीएमओ ने कुछ घंटे के नोटिस पर बैठक बुलाई और इसमें एक हजार विकलांगों के सहायतार्थ जयपुर की एक संस्था द्वारा कैंप आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। सीएमओ ने कहा कि संस्था को प्रति विकलांग ढाई हजार रुपये के हिसाब से 25 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बैठक में उपस्थित जिलाधिकारी डा. सारिका मोहन से कहा कि जनपद में विकलांगों की संख्या नगण्य है। सदस्यों ने रेडक्रॉस के धन का उपयोग अन्य कार्यों में करने की बात कही। इस पर सीएमओ ने कहा कि जयपुर की संस्था से बातचीत कर कैंप का निर्णय लिया जा चुका है।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी के धन से जयपुर की संस्था को पांच लाख का चैक भेज दिए जाने से सदस्यों में भारी रोष है। समिति के कोषाध्यक्ष नरेंद्र मारवाड़ी का कहना है कि रेडक्रॉस से एक बार में एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान नहीं किया जा सकता है। बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन मिलने पर ही चैक बनाया जा सकता था लेकिन बैठक से पूर्व ही पांच लाख रुपये का चैक जारी कर दिया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए न तो कोई टेंडर निकाला गया और न ही कोटेशन मंगाई गई।
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इस संबंध में सीएमओ डा. शशि कुमार अगिभनहोत्री का कहना है कि विकलांगों को यंत्र बांटने के लिए बिना टेंडर के ही एनजीओ को चुना गया है। यह रिनुअल एनजीओ है। एनजीओ का काम अच्छा होने के कारण उसका चयन किया गया है।
रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष डा. सुबोध शर्मा का कहना है कि समिति की बैठक मुश्किल से साल में एक बार ही होती है। समिति को कोई एजेंडा नहीं दिया जाता है। समिति को मनमाने ढंग से प्रशासनिक अधिकारी चला रहे हैं। 15 दिसंबर को हुई मीटिंग की सूचना उन्हें और अन्य सदस्यों को मात्र आधे घंटे पहले दी गई। समय से सूचना न मिलने और शहर से बाहर होने के कारण वह मीटिंग में शामिल नहीं हो पाए। इस मामले में जिलाधिकारी डा. सारिका मोहन का पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
कागजों में सिमटी रेडक्रॉस
प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी के चलते रेडक्रॉस सोसायटी कागजों में ही सिमटकर रह गई है। सोसायटी के बोर्ड से बिना पारित कराए ही मनमाने ढंग से सोसायटी के धन को ठिकाने लगाया जा रहा है। जिला रेडक्रॉस सोसायटी का चुनाव छह साल पूर्व हुआ था। निर्वाचित बोर्ड में 10 डायरेक्टर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष है। चुनाव के छह साल बाद भी निर्वाचित बोर्ड को नियमानुसार कार्यालय का चार्ज नहीं दिया गया। बोर्ड द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव पर भी जिला प्रशासन ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की है। 2009 में लोकसभा चुनाव से पूर्व जिला प्रशासन ने रेडक्रॉस सोसायटी कार्यालय के नाम पर रेडक्रॉस के कोष से सवा लाख रुपये का कंप्यूटर खरीदा और उसे कलेक्ट्रेट के सूचना विज्ञान कार्यालय में लगा दिया गया। इसका विरोध रेडक्रास सोसायटी द्वारा किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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