बिजनौर। गैस के बढ़े दाम व सर्दी ने इस बार ऊर्जा निगम के के अफसरों के पसीने छुड़ा दिए हैं। उपभोक्ताओं ने गैस बचाने व सर्दी से राहत पाने को एसी, हीटर का खूब इस्तेमाल किया है। नतीजा सर्दी के मौसम में जहां ट्रांसफार्मर फुंकने की रफ्तार कम हो जाती थी, वहीं इस बार ओवरलोड के कारण रिकार्ड तोड़ ट्रांसफार्मर फुंके हैं। प्रतिमाह पौने दो सौ से बढ़कर ट्रांसफार्मर फुंकने का आंकड़ा 366 पर पहुंच गया है।
सितंबर 2012 को गैस के दामों में उछाल आया। साथ ही सरकार ने सब्सिडी पर मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या भी निर्धारित कर दी, जिससे उपभोक्ताओं ने गैस की बचत करने के लिए बिजली का अधिक इस्तेमाल किया। गैस के स्थान पर हीटर के उपयोग में लाए गए। इसके अतिरिक्त इस बार सर्दी भी अधिक हुई, जिससे एसी का भी इस्तेमाल हुआ। ओवरलोड बढ़ने से धड़ाधड़ ट्रांसफार्मर फुंके। सितंबर माह से पहले औसतन पौने दो सौ ट्रांसफार्मर फुंक रहे थे, लेकिन गैस के दाम बढ़ते ही अक्तूबर में 360 ट्रांसफार्मर फुंके, जबकि जनवरी में सारे रिकार्ड टूट गए। इस माह में 366 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। 98 प्रतिशत ट्रांसफार्मर आबादी क्षेत्र के हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने से बिजली निगम को डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिमाह की चपत लगी है।
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-ओवरलोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर फुंके हैं। गैस सिलेंडर महंगा होने के कारण भी बिजली का इस्तेमाल हीटर व गीजर में अधिक हुआ, जिसका असर ट्रांसफार्मरों पर पड़ा है। अवैध रूप से हीटर चलाने वाले उपभोक्ताओें के घरों में चेकिंग की जा रही है।
- वीके कौशिक, एक्सईएन
माह फुंके ट्रांसफार्मर
सितंबर 200
अक्तूबर 360
नवंबर 270
दिसंबर 280
जनवरी 2013 366
नोट: ये आंकड़े बिजली निगम से लिए गए हैं। सितंबर में ही गैस के दाम बढ़े थे।