बिजनौर। 84 में से 44 रेलवे फाटक मानवरहित। अभी तक ग्रामीण किसी तरह इन फाटकों को पार करते आ रहे हैं लेकिन ट्रैक बदलते हुए अब ट्रेन की स्पीड दोगुनी होकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने जा रही है। लेकिन इन फाटकों पर गैटमैन नियुक्त करने के प्रयास नहीं हो रहे। ऐसे में जान का खतरा और बढ़ जाएगा।
जिले का नजीबाबाद-मौजमपुर मार्ग काफी पुराना है। इस ट्रैक पर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए इस ट्रैक को बदला जा रहा है। जिससे ट्रेनों की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाएगी। 95 किलोमीटर लंबे इस रेलवे ट्रैक पर 84 फाटक हैं। इनमें से 44 फाटक मानवरहित हैं। अहम बात ये है कि ये सभी मानवरहित फाटक गांवों के आसपास मौजूद हैं। ऐसे में ट्रेनों की बढ़ी स्पीड जहां रोजाना रेलवे ट्रैक पार करने वाले ग्रामीणों के लिए घातक साबित हो सकती है। वहीं कोई बड़ी घटना ट्रेन में सवार यात्रियों का जीवन भी खतरे में डाल सकती है।
दीपावली से एक दिन पूर्व ऐसे ही एक मानवरहित फाटक से गुजर रही ट्रैक्टर-ट्राली व गढ़वाल एक्सप्रेस की टक्कर हो गई थी। गनीमत रही थी कि कोई जान माल की हानि नहीं हुई थी। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की कवायद तो शुरू हो गई है, लेकिन रेलवे द्वारा मानवरहित गेटों पर सुरक्षा के लिए अब तक कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। स्टेशन अधीक्षक चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि विभाग के संज्ञान में यह मामला है लेकिन फाटक पर गैटमैन तैनात करने के दिशा निर्देश अभी नहीं मिले हैं।