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जीने की कला सिखाती है भागवत

Bijnor Updated Thu, 04 Jul 2013 05:30 AM IST
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धामपुर। कथावाचक मारुति नंदन वागीश ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से सुखों की प्राप्ति होती है।
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रानीबाग कालोनी अयोध्या धाम स्थित श्री सीताराम दिव्य मंदिर में आयोजित कथा में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। अग्रजों का सम्मान करने से क्या फल मिलता है और न करने से क्या नुकसान होता है। जो मनुष्य धर्म को कर्म मानकर दायित्वों का निर्वाह करता है, वही समाज में आगे चलकर प्रेरणा स्रोत बन पाता है। उन्होंने कई महापुरुषों के जीवन पर प्रकाश डाला। कहा कि जो मनुष्य नियमित रूप से श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंगों का श्रवण करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उस पर विपत्ति नहीं आती। मंदिर के पीठाधीश्वर श्री महंत केशवाचार्य महाराज ने यज्ञ की महत्ता पर जोर दिया। कार्यक्रम में ज्योति प्रजापति, कविता, मुकुल, विंद्रा, उषा, कंचन, मंजू, जानकी, शशि अग्रवाल, घनश्याम सिंह, कृष्णावतार शर्मा, दीपक सिंह, राजन शर्मा आदि का योगदान रहा।
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