बिजनौर। 46 साल से भी पहले बसे गांव को उजाड़ने की कार्रवाई में लगे वन विभाग के खिलाफ ग्राम प्रधान संगठन ने आरपार की जंग का ऐलान कर दिया है। साथ ही आरोप लगाया कि वन व राजस्व विभाग के अफसरों के ढुलमुल रवैये के कारण आज तक गांव का नियमितीकरण नहीं हो पाया है। प्रधान संगठन ने वन विभाग की ओर से आठ बिंदुओं पर मांगे गए सवालों का जवाब भी दे दिया है।
हल्दौर विकास खंड की ग्राम पंचायत सलेमपुर मथना उर्फ पूरनपुर का गांव रामपुर ठकरा जमीदारी समय से बसा हुआ है। इस गांव को वन विभाग अपनी भूमि पर बसा हुआ बता रहा है, जबकि प्रधान संगठन का दावा है कि गंगा की धारा बदलने के कारण गांव यहां से उजड़ गया, लेकिन वर्ष 1968 में गंगा इस क्षेत्र से दूर हो गई। इस गांव के लोग फिर से यहां पर आ बसे। गांव उस समय से इस जमीन पर काबिज है, जब यहां पर वन विभाग की भूमि भी नहीं थी। इस संबंध में ग्राम प्रधान संगठन के मंडल उपाध्यक्ष डा. भुवनेंद्र सिंह ने वन विभाग को कई दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं। जमींदारी समय में किसानों द्वारा दिए गए लगान की रसीद, गांव को नियमितीकरण करने के लिए 1975 को जारी किया गया राज्यपाल का आदेश व वर्ष 1985 में तत्कालीन डीएम ओमप्रकाश आर्य की संस्तुति रिपोर्ट, गांव को नियमित करने के लिए गठित टीम का दस्तावेज, तत्कालीन तहसीलदार की रिपोर्ट, न्यायालय के आदेश की कापी समेत कई ऐसे दस्तावेज वन विभाग को दिए हैं, जिनमें साफ तौर पर वन व राजस्व विभाग का ढुलमुल रवैया जाहिर हो रहा है। मजे की बात तो ये है कि यह गांव वर्ष 1994 से 95 में अंबेडकर समग्र विकास योजना में भी शामिल रहा है। गांव में स्कूल है। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में विद्युत की लाइन खींची, लेकिन करंट आज तक भी नहीं छोड़ा गया। यहां पर भी वन विभाग ही बाधा बना है। गांव में सड़के हैं। इतना कुछ होने व जमींदारी समय से गांव आबाद होने के बाद भी इस गांव का नियमितीकरण नहीं किया गया। ग्राम प्रधान बीना कुमारी व ग्राम प्रधान संगठन इस प्रकरण में ग्रामीणों के समर्थन में आ गया है। वन विभाग को चेतावनी दी गई कि अगर गांव को उजाड़ा गया तो आंदोलन शुरू हो जाएगा।
गरीब हैं ग्रामीण
प्रधान बीना कुमारी का कहना है कि गांव में ज्यादातर ग्रामीण गरीब हैं। हर साल बाढ़ आती है और इनकी फसल को तबाह कर देती है। दलित व पिछड़े वर्ग के ये लोग गांव उजड़ने पर दोबारा घर नहीं बना पाएंगे।