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मातमी मजलिसों में उठी अली-अली की गूंज

Bijnor Updated Tue, 03 Jun 2014 05:31 AM IST
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नजीबाबाद। दरगाह परिसर में चौथे दिन मातमी जुलूस और मजलिसों के साथ जहां-तहां अली-अली की गूंज सुनाई दी। अंजुमनों ने मातमी जुलूस निकाले तथा नम आंखों से करबला के शहीदों को याद किया।
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दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी की सालाना मजलिसों के अंतिम दिन तड़के से ही मजलिसों एवं मातमी जुलूसों का सिलसिला जारी रहा। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कसीम हैदर ने कहा कि दीन पर कुर्बान होने और जुल्म का मुकाबला करने वाले दुनिया के रहबर होते हैं। कसीम हैदर ने फरमाया कि मौत के खौफ से जो लोग डरते हैं, उन्हें करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत से सबक लेना होगा। जिन्होंने नेकी, इंसानियत, सच्चाई की राह पर चलकर यजीद की पराधीनता को ठुकराकर दीन और इस्लाम के लिए कुर्बानी दी। नसीमुल हसन बाकरी और मौलाना अलकमी के संचालन में आखिरी दिन मौलाना जावेद आबदी, मौलाना कमर सुल्तान, मौलाना रईस जारचवी, मौलाना बकी जाफरी आदि ने मजलिस को खिताब किया। वाकयाते करबला का जिक्र सुनकर जायरीन सीनाजनी को मजबूर हुए। उधर, अंजुमनों ने छुरियों का मातम किया। नोहा ख्वानी और मर्सिया ख्वानी के साथ निकाले गए जुलूसों से पूरा दरगाह परिसर अली-अली, मुश्किल कुशा, मौला अली से गूंज उठा। आज रात मसालमे के साथ चार रोजा मजलिसें अगले साल तक के लिए मुलतवी हो गईं। उधर, दरगाह सचिव सैयद विसाल मेहंदी ने दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री जावेद आब्दी का दरगाह पहुंचने पर स्वागत किया।

रसूल और हुसैन से मिली रोशनी : मौलाना दानिश जैदी
फोटो: 01एनजेडबी3जी
मजलिस को खिताब करने आए सैयद मोहम्मद दानिश जैदी लखनवी ने कहा कि अजमते हुसैन पूरी दुनिया को रोशनी देती है। हजरत इमाम हुसैन का रसूल की निगाह में खास ओहदा रहा। हजरत मोहम्मद साहब और इमामे हुसैन ने दुनिया को दीन के लिए कुर्बान होने की वो रोशनी दी, जिसकी शमां कयामत तक जलती रहेगी।
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इस्लाम देता है अमन का पैगाम : मौलाना बकी जाफरी
फोटो: 01एनजेडबी3एच
मौलाना बकी जाफरी अकबरपुर ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम ने प्यार-मोहब्बत, अमन और एकता का पैगाम दिया। इस्लाम में रोजा, नमाज और इबादत के साथ गरीबों और मुफलिसों की मदद की हिदायत है। इन हिदायतों पर अमल करना इंसानी फर्ज है।
इस्लाम ने दिया इंसानियत का पैगाम : मौलाना इकरार रजा
फोटो: 01एनजेडबी3एफ
इकरार रजा आबदी ने कहा कि रसूले इस्लाम कुरआन जैसी किताब और इस्लाम जैसे दीन को लेकर इंसानियत बचाने के लिए अरब की सरजमीं पर आए। कुरआन और इस्लाम ने इंसानियत का पैगाम दिया। दुनिया रसूल के बताए रास्ते को अपनाकर आखिरत संवारने में जुटी है।
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