बिजनौर। गर्भवती महिला व आशा सच्ची है अथवा जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट! गांव की आशा व पीड़ित महिला स्वयं को तीन माह की गर्भवती बता रही है, तो वहीं जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पीड़ित महिला को मात्र डेढ़ माह यानी सात सप्ताह की गर्भवती बता रहा है। मामला पुलिस पिटाई से महिला के गर्भपात का जुड़ा होने के कारण इसमें स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की मिलीभगत की बू आ रही है, जबकि आशा के तीन माह की गर्भवती होने की बात रजिस्टर में दर्ज होने की बात कह रही है।
क्षेत्र के गांव नवलपुर में एक किसान के हत्यारोपी के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों ने थाने पर प्रदर्शन किया था। पुलिस व ग्रामीणों ने नोकझोंक के बाद मारपीट शुरू हो गई। मृतक किसान काके की भाभी संतरेश पत्नी बलराम का आरोप है कि मारपीट के दौरान दरोगा ने उसके पेट पर लात मारी थी, इससे उसका गर्भपात हो गया। अधिक पीड़ा होने पर शुक्रवार की रात उसे परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां शनिवार दुपहर 11 बजे उसका अल्ट्रासाउंड हुआ। अल्ट्रासाउंड में गर्भ में भ्रूण करीब डेढ़ माह का बताया गया। जबकि पीड़ित महिला स्वयं को तीन माह से अधिक की गर्भवती बता रही है।
आशा कहिन
आशा पूर्णिमा देवी का कहना है कि संतेरश के गर्भवती होने की उन्हें जानकारी है। वह तीन माह से अधिक की गर्भवती है तथा उसका नाम रजिस्टर में अंकित है। वह शनिवार को गर्भवती संतरेश के टीका लगाने के लिए उसके घर गई, तो उन्हें जानकारी मिली कि वह जिला महिला अस्पताल में भर्ती है।
इमरजेंसी में नहीं कराया अल्ट्रासाउंड
पीडित संतरेश को रात करीब दस बजे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गर्भपात की सूचना पर एसडीएम व तहसीलदार तक रात में ही गांव जा पहुंचे, लेकिन पुलिस को बचाने की जुगत भिड़ाने के लिए महिला का रात में इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया। आरोप है कि चिकित्सकों से साठगांठ के बाद दुपहर करीब 11 बजे अल्ट्रासाउंड किया गया।
प्रशासन महिला की जिंदगी को लगा रहा दांव पर
गर्भवती महिला को यदि ब्लीडिंग हो जाए, तो चिकित्सक तुरंत उसे सफाई कराने की सलाह देते हैं। ब्लीडिंग के बाद भ्रूण नष्ट हो जाता है। यदि उसकी सफाई न कराई जाए, तो गर्भाशय में सेप्टीसिमिया बन जाता है। इसमें महिला की जान पर बन आती है और मौत तक हो जाती है। पीड़ित महिला को काफी मात्रा में ब्लीडिंग हुई है और अस्पताल में भर्ती हुए भी करीब 24 घंटे बीतने को हैं, लेकिन अभी तक महिला के गर्भ की न तो सफाई कराई गई और न ही संबंध में किसी चिकित्सक ने कुछ बताया है।
एएनएम मंजू वर्मा का कहना है कि पिछले सप्ताह वह टीकाकरण के लिए गांव गई थी। उन्हें संतरेश के करीब साढ़े तीन माह की गर्भवती हो की बात पता चली थी, लेकिन संतरेश के न मिल पाने के कारण उसका टीकाकरण नहीं हो सका। जब वह गर्भवती टीकाकरण कर देती है, तभी उसका नाम अपने रजिस्टर में दर्ज करती है।
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जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. अलका दीक्षित का कहना है कि वह इलाहाबाद आई हुई हैं। इस मामले की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। वह वापस अस्पताल आने पर ही कुछ बता पाएगी।