बिजनौर में आंगनबाड़ी केंद्रों और परिषदीय स्कूलों में आने वाले बच्चों की डुप्लेकेसी रोकने के लिए शासन ने आधार नंबर को हथियार बनाया है। शासन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के आधार कार्ड बनवा रहा है।
आधार नंबर फीड करके यह देखा जाएगा कि बच्चों के नाम दोनों जगह ही तो नहीं लिखवाए गए हैं। बच्चों से कुपोषण दूर करने के लिए महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग की ओर से अनेक योजनाएं चलाई जाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर सात महीने से लेकर छह साल तक के बच्चे आते हैं। वहीं परिषदीय स्कूलों में बच्चे के छह साल का होने के बाद एडमिशन होने का प्रावधान है, लेकिन परिषदीय स्कूलों के शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गलत तरीके से आयु के मानक पूरे नहीं करने वाले बच्चों के नाम भी अपने केंद्रों में लिख लेते हैं। एक ही बच्चे के नाम दोनों जगह लिखकर फर्जीवाड़ा किया जाता है, लेकिन अब शासन ने आधार नंबर को हथियार बनाया है। प्राइमरी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र दोनों जगह आधार नंबर फीड किए जा रहे हैं।
आधार नंबर फीड होने के बाद दोनों विभागों के बच्चों के आधार नंबर का मिलान कराया जाएगा। जिन बच्चों के नाम दोनों विभागों में लिखे होंगे, उनके नाम किसी एक विभाग से काटे जाएंगे। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार शासन के निर्देश पर दोनों विभागों के बच्चों के आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं।