छापामारी नहीं, औपचारिकता निभाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
कई अस्पतालों में दवाओं के लिए सेंपल, शाम तक कार्रवाई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। वाह रे स्वास्थ्य विभाग! एक सप्ताह से शहर में भ्रूण हत्याओं के मामले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है और स्वास्थ्य विभाग की नींद गुरुवार को टूटी। नींद टूटी तो स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ औपचारिकता ही निभाई। कई अस्पतालों में छापामारी की, दवाओं के दवाओं सेंपल लिए लेकिन देर शाम तक कार्रवाई शून्य रही।
भ्रूण हत्यारों पर लगाम कसने की शुरूआत सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एक सप्ताह पहले की थी। उस समय पुलिस की रडार पर जीवन ज्योति अस्पताल आया था। उस मामले में पुलिस ने एक डॉक्टर समेत चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और एक व्यक्ति को जेल भेजा। इससे पहले सिविल लाइंस थाना ने पुलिस सरकार हॉस्पिटल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। ऐसा नहीं था कि सिर्फ यही अस्पताल भ्रूण हत्याएं कर रहे थे। इनके अलावा शहर के अलग-अलग स्थानों पर भी भ्रूण मिले लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आज तक अपनी ओर से कोई कदम नहीं उठाया और न ही यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर कौन-कौन से अस्पतालों से भ्रूण सड़कों, नालियों में फेंके जा रहे हैं। न ही स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। करीब एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है। तब से जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकीं हैं। आज की कल करते हुए स्वास्थ्य विभाग को न तो रजिस्ट्रेशन पता कर मिले और न ही अस्पतालों में छापामारी की गई। गुरुवार तो पता नहीं स्वास्थ्य विभाग में हिम्मत आ गई और एसीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार कुछ कर्मचारियों के साथ शहर के अस्पतालों में छापामारी करने निकल पड़े। उन्होंने खेड़ा नवादा के कई अस्पतालों में चेकिंग की औपचारिकता निभाई। दवाओं के सैंपल लिए और बैरंग लौट गए। परंतु देर शाम तक स्वास्थ्य विभाग की ओर किसी भी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
वर्जन-
आज मैं वीडियो कांफ्रेंसिंग में था। टीम शहर में गई थी। कहां-कहां गई थी अभी मेेरे पास रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है कि कहां क्या कमी पाई गई।- डॉ. आशाराम, सीएमओ