चंदौली। नगर के सेंट थामस स्कूल में मंगलवार को आयोजित रक्तदान शिविर में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। प्रधानाचार्य जेएच रिचर्ड ने शिक्षकों संग मिलकर जिला अस्पताल व वाराणसी के एक निजी हास्पिटल की चिकित्सकीय टीम को बंधक बनाया लिया। उनका आरोप था कि निजी चिकित्सालय वाले जिला चिकित्सालय के कर्मियों की मिलीभगत से खून की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। बाद में ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सक डा. अशोक कुमार के लिखित आश्वासन पर बंधक बनाए गए चिकित्सकों को छोड़ा गया।
सेंट थामस स्कूल में मंगलवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। खून लेने के लिए जिला अस्पताल की टीम को बुलाया गया था। रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल की टीम के अलावा वाराणसी के एक निजी चिकित्सालय के चिकित्सकों की टीम भी पहुंची। शिविर में शिक्षकों के अलावा अभिभावकों ने रक्तदान किया। इस अवसर पर कुल 22 लोगों ने रक्तदान किया। पहले से यह तय था कि शिविर में डोनेट किया गया खून जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में जमा किया जाएगा। यहां खून लेने पहुंचे जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों संग कुछ नए लोगों को देख शिक्षकों को संदेह हुआ। उन्होंने यह बात प्रधानाचार्य जेएच रिचर्ड को बताई।
प्रधानाचार्य ने जब पूछताछ की तो पता चला कि टीम में कुछ चिकित्सक वाराणसी के एक निजी चिकित्सालय से जुड़े हैं। इस पर खून की खरीद-फरोख्त की आशंका होने पर शिक्षकों ने पूरी टीम को बंधक बना लिया और पूरे मामले से सीएमओ तथा सीएमएस को अवगत कराया। प्रधानचार्य ने एसपी मुनिराज जी को भी मामले की जानकारी दी। इस संबंध में डा. अशोक कुमार ने बताया कि चिकित्सालय का ब्लड बैंक और निजी चिकित्सालय का ब्लड बैंक एक की संस्था से संचालित है। किसी कर्मचारी ने शिविर की सूचना संस्था को दे दी थी। इसलिए निजी चिकित्सालय वाले भी सहयोग के लिए आए थे। इस बाबत सीएमएस डा. पीसी जायसवाल का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।