चित्रकूट। थाना पहाड़ी के पिलखिनी गांव में अवैध खनन का विरोध ग्रामीणों को महंगा पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे खुन्नस खाकर खनन माफिया के इशारे पर एसओ पहाड़ी ने उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा लिख दिया और थाने में मारा-पीटा। उन लोगों ने जब कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सहायता से एसडीएम कोर्ट में फरियाद की तब कहीं जाकर वे छूटे। अब इन लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
पिलखिनी गांव में घनश्याम सिंह पुत्र महिपाल निवासी सगवारा थाना राजापुर का बालू का पट्टा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पट्टाधारक निर्धारित जगह पर खनन न कर घाट पर मानक के विपरीत बिना परमीशन के दो पनडुब्बी, दो जेसीबी और पोकलैंड मशीनों को लगाकर सार्वजनिक स्नानघाट के पास लगभग 40 फीट तक गहरा कर चुका है। इससे वहां लोगों के साथ जानवरों के डूबने का खतरा बढ़ गया है। रामपाल, रामसिंह निषाद, अवधेश कुमार, उमेश कुमार, रामप्रसाद आदि ने एसपी को भेजे पत्र में कहा है कि 11 जून की अपराह्न लगभग तीन बजे थानाध्यक्ष पहाड़ी सुरेंद्र सिंह और खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह पिलखिनी घाट पहुंचे और उन लोगों को पकड़कर थाने ले गए। वहां रात भर उन लोगों को रखा गया और यातनाएं दी गईं। राम सिंह की जेब से दो हजार और राम पाल की जेब से सात सौ रुपये भी निकाल लिए गए। इनका कहना है कि इसके बाद पुलिस ने अगले दिन झूठा चालान कर दिया और कोतवाली में रखकर मारा पीटा। अधिवक्ता अमित यादव ने बताया कि इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप त्रिपाठी, भीमसेन मिश्रा, घनश्याम यादव, विनीत पयासी और राजेंद्र पांडे आदि अधिवक्ताओं के साथ उन लोगों ने उप जिलाधिकारी से मिलकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और न्याय का अनुरोध किया। ग्रामीणों के अधिवक्ता घनश्याम यादव ने बताया कि बाद में एसीडीएम कोर्ट से सभी की जमानत मंजूर हो गई। उन्होंने कहा कि अवैध खनन का विरोध करने पर ही ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस ने गलत कार्रवाई की है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मेरा कोई रोल नहीं- खनिज अधिकारी
खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जेसीबी लगाने के मामले में पट्टाधारक के खिलाफ जुर्माना किया जा चुका है। पट्टा में काम कर रहे मजदूरों के साथ इन ग्रामीणों ने मारपीट की है और पट्टाधारक के पट्टे की जमीन में ही इन लोगों ने सब्जी लगा रखी हैं। यह मौके पर जाकर देखा जा सकता है। इन लोगों की शिकायत थाने में होने पर पुलिस गई थी। मेरी शिकायत गलत की जा रही है।
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एसओ बोले, जो चाहें छाप दें
उधर, इस संबंध में जब एसओ सुरेंद्र सिंह से पूछा गया तो उनका जवाब था कि वैसे तो खदान बंद हैं और आरोप गलत है पर अगर ग्रामीण कह रहे हैं तो वे भी सही कह रहे होंगे। जो वे कह रहे हैं वही छाप दीजिए।