चित्रकूट। देश का युवा ओजस्वी है, ऊर्जावान है, भावना से परिपूर्ण भी है लेकिन उसे उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से देश में सामाजिक व चारित्रिक गिरावट नजर आ रही है। यह बात जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री महंत नारायण गिरी ने अपने बिजावर मंदिर प्रवास के दौरान पत्रकारों से कही। उनके शिष्य बिजावर मंदिर के महंत शांतम गिरी ने उनका स्वागत व पूजन किया।
नारायण गिरी ने कहा कि आज के माता पिता की यह जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों की हर जरूरत को पूरा करने के साथ उनकी उचित निगरानी भी करें। इससे बच्चे को भटकाव से बचा सकें। देश की राजनीति के बारे में कहा कि देश के प्रधानमंत्री तो मनमोहन के बजाय मौनमोहन हो गए हैं। उम्मीद थी कि बड़े अर्थशास्त्री हैं देश के हालात सुधरेंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा। गिरी बोले कि देश के प्रधानमंत्री के जो भी सलाहकार हैं वे उन्हें देश की जनता के मनोभावों की समझ ही नहीं है। अटलबिहारी बाजपेयी, लालबहादुर शास्त्री आदि देश की जनता की नब्ज जानते थे इसलिए अच्छे प्रधान मंत्रियों में उनका नाम लिया जाता है। गिरी ने मंदाकिनी सहित सभी नदियों के प्रदूषण के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का इरादा जताया। आशाराम के बारे में कहा कि वह कथावाचक हैं। संत हैं ही नहीं।
इससे पहले नारायण गिरी का बिजावर मंदिर में स्वागत व पूजन किया गया। संत शांतम गिरी, महंत राजगिरी महाराज, महंत दिव्यजीवन दास ने गुरु की महिमा के बारे में बताया। शांतम गिरी ने कहा कि गुरु को चांद की संज्ञा दी गई है जो ईश्वर से प्रकाश लेकर भक्तों को लुटा देते हैं। हम गुरु को नहीं चुनते हैं बल्कि गुरु ही शिष्य के ऊपर कृपादृष्टि करता है। गुरु व्यक्ति नहीं बल्कि श्रद्धा है। इस मौके पर एक भजन भी गाया गया।