मऊ (चित्रकूट)। नियमों को ताक पर रखकर पत्थरों का खनन किया जा रहा है। हाथ में पट्टा है तो पूरी मनमानी हो रही है। कारोबारी अब यह भी नहीं देखते हैं कि इससे तकलीफ किसे है। विरोध के बाद भी ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि बरगढ़ क्षेत्र में स्कूल के पास भी ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे स्कूली बच्चे भी दहशत में हैं।
बरगढ़ थाने के डोडिया क्षेत्र में पत्थर खनन का काम जोरों पर है। जिस क्षेत्र में यह खनन हो रहा है, वहां से महज 50 मीटर की दूरी पर डोडिया पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। लगभग इतनी ही दूरी पर मुंबई जाने वाली रेलवे लाइन है। खनन के दौरान पत्थर तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग की जाती है। धमाके के बाद चारों तरफ पत्थर के टुकड़े उड़ते हुए नजर आते है। धूल का गुबार फैलता है। इससे समस्या तो सभी को होती है, किंतु सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूल पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे होते हैं। ब्लास्टिंग से बच्चे डर जाते हैं। पत्थर की धूल उनकी सांसों में समा जाती है, जिससे उनकी सेहत खराब हो रही है। विद्यालय में लगभग 85 बच्चे पढ़ते है, लेकिन ब्लास्टिंग के शोर के कारण बच्चे भी स्कूल जाने से कतराते हैं। इतना ही नहीं ब्लास्टिंग की जगह से कुछ ही दूरी पर हरिजन बस्ती भी है। बस्ती में रहने वाले लोग भी धमाके से दहल जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार समीप ही रेलवे लाइन होने के कारण भी हादसे का डर रहता है। गांव वालों के अनुसार इस संबंध में कई बार अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। उल्टा उन्हें ही धमकाया जाता है।
पट्टे से अधिक खनन
जितने क्षेत्र में खनन का पट्टा है, उससे अधिक दायरे में खनन किया जाता है। इससे किसानों की जमीन बर्बाद हो रही है। इस बारे में भी ग्रामीणों ने शिकायत की थी। शिकायत पर खनिज अधिकारी ने पैमाइश के आदेश दिए और दायरे से अधिक में जो खनन हुआ है, उस गड्ढे को भरने का आदेश भी दिया है।
किसानों की और भी हैं समस्याएं
बरगढ़, मऊ, पहाड़ी आदि क्षेत्रों में जहां खनन हो रहा है, वहां के किसानों की और भी समस्याएं हैं। ग्रामीणों के अनुसार खनन के बाद वाहन उनके खेतों के बीच से निकलते हैं, जिससे उनकी खेत में खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है। वाहनों के गुजरने से खेत इतने सख्त हो जाते हैं कि जुताई ही ढंग से नहीं हो पाती। इससे फसल की पैदावार भी प्रभावित होती है।