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राजापुर में आज से शुरू होगी रामलीला

Chitrakoot Updated Fri, 19 Sep 2014 05:31 AM IST
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राजापुर (चित्रकूट)। प्राचीन रामलीला का मंचन शुक्रवार से माधोगंज स्थित रामलीला मैदान में शुरू होगा। 18 दिवसीय रामलीला में आदर्श रामलीला कमेटी मसुरी (बांदा) के कलाकार रामलीला मंचन में विभिन्न किरदार निभाएंगे।
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बुजुर्गों की मानें तो 1915 से इस रामलीला का मंचन हो रहा है। तब स्व. केशनी प्रसाद मिश्र ने रामलीला कमेटी का गठन किया था। वर्तमान अध्यक्ष श्यामसुंदर मिश्र बताते हैं कि तब स्थानीय कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते थे। राजापुर के अलावा आसपास के गांवों के लोगों की भारी भीड़ जुटती थी। रामलीला देखने की इतनी ललक रहती कि लोग शाम होते ही अपनी जगह ले लेते। आढ़ती रोजाना रमचंदी के नाम पर हर दुकान से एक पाव (ढाई सौ ग्राम लगभग) अनाज देते और इससे रामलीला के कलाकारों का खाना बनता। अब तो चंदा लेकर किसी तरह आयोजन किया जाता है। न तो लोगों में वह उत्साह रहा और न ललक। उन्होंने बताया कि तीन दशक पहले तक राजापुर के स्थानीय कलाकारों का बोलबाला था। स्व. मोहनलाल भट्ट रावण का, स्व. नामदेव बाणासुर और मेघनाद का, गंगाधर मिश्र मुनि का, ओंकार प्रसाद अंगद का, शिवगणेश पांडे दशरथ और हनुमान का चरित्र अभिनय करते तो दर्शक वाह-वाह कर उठते थे। धनुष यज्ञ के दिन सुबह तक लीला होती और देखने वाले डटे रहते थे, लगता था जैसे मेला हो। प्रेमचंद्र चतुर्वेदी के विदूषक का रोल देखने तो दूर-दूर से लोग आते थे। तुलसी इंटर कालेज के बच्चे राम लखन और सीता के स्वरूप निभाते। उन्होंने कहा कि अब टीवी और अन्य मनोरंजन के साधनों के आने से लोगों की रुचि कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि आदर्श रामलीला कमेटी अब भी इस आयोजन को करती आ रही है। शुक्रवार से यह शुरू होगा।

इनसेट
मनु-सतरूपा की तपस्या से खुश हुए विष्णु
पुरानी बाजार रामलीला भवन में गुरुवार को मनु-सतरूपा तपस्या और रावण जन्म की लीला का मंचन किया गया। संपूर्ण मानव जाति की उत्पत्ति राजा मनु और उनकी पत्नी सतरूपा से हुई मानी गई है। जीवन के चौथे काल में उन्होंने सपत्नीक घोर तपस्या की और इससे प्रसन्न होकर नारायण ने उनको दर्शन दिए। बाद में भगवान विष्णु ने उनको वरदान दिया कि जब वह अयोध्या के राजा होंगे तो भगवान उनके पुत्र के रूप में आएंगे, ऐसा ही हुआ।
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