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बढ़ रही टेंपो और टैक्सी चालकों की अराजकता

Chitrakoot Updated Sun, 05 Oct 2014 05:32 AM IST
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चित्रकूट। तीर्थक्षेत्र में टेंपो-टैक्सी चालकों की अराजकता लगातार बढ़ रही है। चौराहों पर खड़े यातायात पुलिस की अनदेखी कर कहीं से भी सवारियां भरने लगते हैं। निर्धारित संख्या के बाद भी रास्ते में अगर सवारी ने हाथ दिया तो उसे भी ठूंसने से गुरेज नहीं करते। दीपावली नजदीक है और तब आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा को देखते हुए इन पर अंकुश लगाना जरूरी है।
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गौरतलब है कि पुलिस अधीक्षक स्वामी प्रसाद ने कार्यभार ग्रहण करते समय पत्रकारों से बातचीत में दावा किया था कि वह सप्ताह भर के अंदर सबसे पहले टेंपो-टैक्सी चालकों की निरंकुशता पर ही अंकुश लगाएंगे। उनसे रेलवे स्टेशन, ट्रैफिक चौराहा, बस स्टैंड, पुराने अस्पताल, सीतापुर, बेड़ी पुलिया आदि विभिन्न जगहों पर टेंपो चालकों द्वारा यात्रियों को परेशान करने की शिकायत की गई थी। उन्हें आए लगभग एक महीना होने को है पर स्थिति जस की तस है। यहां यह बताना जरूरी है कि हर माह होने वाली अमावस्या में प्रशासन की सख्त ताकीद के बाद भी कि बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशान न किया जाए, उनसे निर्धारित किराया वसूला जाए, टेंपो-टैक्सी चालक नहीं मानते। न तो किसी टेंपो-टैक्सी पर निर्धारित किराए की सूची चस्पा नजर आती है और न वे इस आधार पर किराया ही वसूलते हैं। युवा व्यापारी नेता शानू गुप्ता, शेषू जायसवाल, बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, व्यापारी नेता और समाजसेवी पंकज अग्रवाल आदि का कहना है कि दीपावली में जब लाखों की भीड़ तीर्थक्षेत्र में आती है तब इन टेंपोवालों की अराजकता चरम पर होती है ये उनसे मनमाना किराया वसूलते हैं और सवारी ठूंसकर चलते हैं। वहीं टेंपोचालक अपना नाम छिपाते हुए बताते हैं कि वे लोग लोन लेकर वाहन लेते हैं और ऐसे में उनकी कमाई न होने से भी दिक्कत आती है। कुछ तो इस बात का भी दावा करते हैं कि बाकायदा चौकियों और थानों में इस संबंध में पैसा बंधा है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। उधर, चौकी प्रभारी सीतापुर मधुसूदन मिश्रा ने बताया कि पुलिस को पैसा बंधा होने की बात सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि एक बार अभियान चलाकर कुछ टेंपोचालकों पर कार्रवाई की थी तो एक सत्ताधारी दल के नेता का जबर्दस्त दबाव पड़ा था।

सवारियों से खींचतान हो गई आमबात
रेलवे स्टेशन के बाहर सवारियों को अपनी तरफ खींचने की बात तो अब आम हो गई है। बाहर से आने वाले यात्रियों को पहले अपने वाहन में बैठा लेने की कवायद में अक्सर टैक्सी वाले महिलाओं-लड़कियों से अभद्रता कर बैठते हैं। पूर्व में तैनात रहे कुछ कोतवाली प्रभारियों ने यहां पर अभियान भी चलाया था और तब इस अभद्रता में रोक भी लगी थी पर अब तो सब जस का तस है।
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