चित्रकूट। शनिवारी अमावस्या में लगभग तीन लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान करने के बाद महाराजाधिराज मत्यगयेंद्रनाथ का जलाभिषेक कर कामदगिरि की परिक्रमा लगाई।
मार्गशीर्ष मास की शनिवारी अमावस्या में हालांकि इस बार अपेक्षाकृत कम भीड़ उमड़ी। इसकी एक वजह किसानों का खेती में व्यस्त रहना रहा। इस समय पलेवा और बुआई का सीजन है। प्रशासन को लगभग पांच लाख लोगों के आने की आशा थी। पर लगभग तीन लाख आस्थावान ही इस अमावस्या में आए। ट्रेनों, बसों में भी उतनी ज्यादा भीड़ नहीं रही। हल्की ठंड के बीच सुबह से ही मंदाकिनी नदी में श्रद्धालुओं के स्नान का क्रम शुरू हो गया था। इस अमावस्या का बहुत महत्व है। ग्रामीण अपनी रबी की फसल की बुआई के पहले इस अमावस्या में कामदगिरि में मत्था टेकने को शुभ मानते हैं। अमावस्या के शनिवार को पड़ जाने से इसका महत्व और बढ़ गया।
पहली बार आया, बहुत अच्छा लगा- निर्मल
कानपुर निवासी निर्मल शुक्ला ने कहा कि वह अमावस्या पर पहली बार आए हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। सभी धार्मिक स्थानों के दर्शन की उन्होंने इच्छा जताई।
भगवान की कृपा है- दिनेश
कानपुर के ही दिनेश ने कहा कि जब तक भगवान की कृपा होती है तभी तीर्थस्थान पर आना होता है। अब जब भी समय मिलेगा आते रहेंगे।
पढ़ाई से समय निकालकर आया- ऋषभ
ऋषभ शुक्ला का कहना था कि पढ़ाई की वजह से चित्रकूट आना नहीं होता। इस बार छुट्टी लेकर परिवार के साथ आए हैं। यहां स्नान करने से मन शुद्ध होता है। जब भी छुट्टियां मिलेंगी, आते रहेंगे।
मंदाकिनी में स्नान कर धन्य हुई- ज्योति
कानपुर की ज्योति ने कहा कि मंदाकिनी में स्नान कर भगवान को जलाभिषेक कर खुशी महसूस कर रही हूं। जब भी अवसर मिला अमावस्या में यहां आऊंगी।
दूसरी बार आना हुआ- किरन
किरन ने बताया कि वह दूसरी बार यहां आई हैं। अमावस्या में चित्रकूट आने का अपना महत्व है। बताया कि वह हर अमावस्या में यहां आने की इच्छा रखती हैं।
हर अमावस्या को आना चाहती हूं- तृप्ति
कानपुर की ही तृप्ति अवस्थी समय मिलने पर अमावस्या को आती रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार चौथी बार आई हैं। यहां के मंदिरों के दर्शन से पुण्य होता है। हर अमावस्या को आना चाहती हैं।
पिछले पांच साल से लगातार आ रहे- रवीन
रवीन अवस्थी ने बताया कि वह पिछले पांच साल से लगातार हर अमावस्या को यहां आते हैं। अन्य लोगों को भी यहां लाने की कोशिश करते हैं। भगवान की ऐसी कृपा बनी रहे और वह यहां आते रहें, यही मंशा है।