सीतापुर (चित्रकूट)। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने गुरुवार को यह कहकर अपने शिक्षकों को स्तब्ध कर दिया कि यहां कार्यरत शिक्षक विकलांगों को शिक्षा देने में कंजूसी करते हैं। इनकी कथनी करनी में अंतर है। वे जिस पेड़ की डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं।
कुलाधिपति विश्वविद्यालय परिसर में कोचर छात्रावास के लोकार्पण पर बोल रहे थे। उनके आज के वक्तव्य में विवि में वर्तमान में चल रही हलचलों का पुट साफ नजर आया। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह विवि विकलांगों को शिक्षित करने के लिए स्थापित किया है। चित्रकूट व सरकार से एक पैसा नहीं लिया है। विवि को बदनाम करने व मुझे गलत फंसाने में विवि में कार्यरत लोगों का ही हाथ है। मैंने जीवन में कोई गलत काम नहीं किया है। मैं जीवन भर विकलांगों की सेवा करता रहूंगा और जीवन भर कुलाधिपति रहूंगा। मुझे कोई भी इस पद से नहीं हटा सकता। मैं इस विवि को केंद्रीय विवि बनाऊंगा। मुख्य अतिथि सपा विधायक भदोही विजय मिश्र ने कहा कि वह मुलायम सिंह से निवेदन करेंगे कि वह इस विवि की मदद करें। जो भी जांच शासन द्वारा की जा रही है, उसमें न्याय होगा। निर्दोष को नहीं फंसाया जाएगा। कुलाधिपति की सचिव डा. गीता देवी मिश्र ने कहा कि आज ही के दिन 2001 में उत्तर प्रदेश शासन ने जगद्गुरु को विवि का कुलाधिपति नामित किया था। कुलपति प्रो. बी पांडे ने कहा कि विकलांगों में विशेष कला योग्यता होती है। विवि के लोकार्पित कोचर छात्रावास में 56 कमरे भूमितल और इतने ही प्रथम तल पर बने हैं। इस अवसर पर विकलांगों के लिए मां वीणावादिनी स्टूडियो और दृष्टिहीनों के लिए प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया गया। कुलसचिव प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी ने स्वागत किया। हेमराज चतुर्वेदी, आरपी मिश्र, विधायक पुत्री सीमा मिश्रा, शीलन आदि मौजूद रहे। संचालन प्रो. योगेश दुबे ने किया।