उत्तर प्रदेश के लखनऊ में केंद्र की तर्ज पर सिटीजन चार्टर लागू करने पर विचार कर रही है।
सरकार इसे अधिनियम के तहत लागू करना चाहती है ताकि सभी विभागों में समानता आ सके और जनता की समस्याओं का समाधान अधिनियम के तहत आसानी से हो सके।
वर्तमान में कई विभागों ने अपना चार्टर बनाया हुआ है। नई व्यवस्था के तहत पहले विभागों में और बाद में जिला स्तर पर इसे लागू करने की योजना है।
असल में केंद्र सरकार ने आम जनता की सहूलियत के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में सिटीजन चार्टर लागू किया है। इसी की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी अधिनियम बनाकर सिटीजन चार्टर लागू किया है।
लेकिन इस अधिनियम के बनने से पहले ही कई विभाग अपने-अपने स्तर से चार्टर को लागू कर चुकेहैं। लिहाजा अलग-अलग विभागों में अलग-अलग चार्टर लागू है।
इस लिहाज से अब प्रदेश सरकार सभी विभागों में एक समान चार्टर लागू करना चाहती है। सरकार ने इसकी जिम्मेदारी लोक सेवा प्रबंधन विभाग को सौंपी है।
प्रदेश में करीब 25 विभाग ऐसे हैं जिन्होंने अपना चार्टर लागू कर दिया है लेकिन इसका खास फायदा सामने नहीं आया।
दरअसल आम जनता से जुड़े विभाग उनके लिए सहूलियतें प्रदान करने के लिए चार्टर लागू करते हैं।
इसके तहत विभाग में आने वाले व्यक्ति को अधिकारियों और कर्मचारियों केचक्कर न काटने पड़े इसके लिए एक प्रकोष्ठ बनाकर चार्टर लागू किया जाता है।
कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर प्रकोष्ठ में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और एक तय समय में उसे विभाग को जवाब देने की बाध्यता होती है।