देवरिया। पारा तेजी से चढ़ रहा है, लेकिन तालाबों में उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
मनरेगा से खुदाई किए गए तालाबों में केंद्र सरकार से मिले धन को पानी की तरह बहा दिया गया। मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपये खर्च करके गांव-गांव तालाबों की खुदाई तो कई बार करा दी गई है लेकिन उसके बाद यह तालाब पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। सरकार की यह योजना थी कि हर गांव में एक-एक आदर्श तालाब बनाया जाय।
इन तालाबों में पानी न सूखे इसके लिए उसमें पंप लगाकर उसको चालू रखा जाय ताकि गरमी के मौसम में पशुओं को पीने के लिए पानी की किल्लत न हो और भूगर्भ जलस्तर को गिरने से रोका जा सके। इसके तहत जिले के 600 ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाब बनाए गए थे। इसके अलावा करीब 1000 पोखरियों का सुंदरीकरण किया गया था।
इन तालाबों से खेतों की सिंचाई करने की भी व्यवस्था दी गई थी। किसी भी पोखरी में कहीं भी पानी की व्यवस्था नहीं है। पानी की जगह इसमें धूल उड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि न तो गांववालों को इस तालाब का लाभ मिल रहा है और न गांव के लोग अपने मवेशियों को पानी पिला पा रहे हैं। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों को पोखरियां भरे जाने का निर्देश दिया गया है। कई ग्राम पंचायतों ने पोखरियों को भरा भी हैं गरमी के चलते पानी सूख गई होगा। वैसे इन पोखरियों को दोबारा भरे जाने के लिए निर्देश दिया जा रहा है। जल्द ही पोखरियों को भर दिया जाएगा।