देवरिया। जिले में जेई/एईएस का हाल जानने मंगलवार को जिले में संयुक्त निदेशक और स्टेट कार्यक्रम अधिकारी सीएमओ कार्यालय आए। सीएमओ, एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ और पीएचसी/सीएचसी के प्रभारी/अधीक्षक के साथ बैठक कर इसके कारण, उपचार और दवाओं के बारे में जानकारी ली।
संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य भवन लखनऊ डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी जेई/एईएस के मरीजों को भर्ती किया जाए। स्थिति में सुधार नहीं होने की दशा में ही जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जाए। स्टेट कार्यक्रम अधिकारी जेई/एईएस डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी पर मैन पावर, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। रेफर होने वाले मरीजों को अपने वाहन से भेजा जाए। मरीज के साथ पैरामेडिकल स्टाफ भेजा जाए। एसीएमओ डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि कोशिश की जाए कि मच्छर बनने ही न पाएं। छोटे गड्ढों में बीटीएस और टेंफास का छिड़काव और बड़े तालाबों में गंबूजिया मछली का पालन कराया जाए। मच्छरों को मारने के लिए फॉगिंग कराई जाए। सहायक जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने जेई/एईएस पर की गई अब तक की कार्रवाई और तैयारियों के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एएन तिवारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. रामेश्वर सिंह, सीएमएस डॉ. यूडी त्रिपाठी और डीपीएम पूनम समेत जिले के सभी पीएचसी/सीएचसी के प्रभारी/अधीक्षक मौजूद रहे।