सलेमपुर। क्रय एजेंसियों व सहकारिता विभाग की खींचतान में क्रय केन्द्रों की सूची जारी नहीं हो सकी है। चार दिन से सुबह सूची तैयार हो रही है और शाम को निरस्त कर दी जा रही है। इस बात की चर्चा विभाग के अलावा जिले के अन्य कर्मचारियों में जोरों पर है। वहीं किसान इसे लेकर चिंतित हैं।
शासन की मंशा पर जिले के अधिकारी खरा नहीं उतर रहे हैं। चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए दो विभाग आमने-सामने हो गए हैं। एक अक्टूबर से जिले में धान की खरीद होनी है। लेकिन अभी तक क्रय केन्द्रों की सूची जारी नहीं हो सकी है। सूची जारी करने के लिए जिम्मेदारों के पास सिर्फ एक दिन का समय बचा है।
सहकारिता विभाग पुराने केन्द्रों को चलाने की बात कह रहा है जबकि क्रय एजेंसी का कहना है कि पिछले वर्ष जो केन्द्र व उनके मिलर (सीएमआर) चावल एवं सरकारी धन रोके हैं उन्हें निरस्त कर साफ सुथरे केंद्र बनाए जाएं। पिछले वर्ष एफसीआई मिलरों का चावल मानक के विपरीत बताकर रिजेक्ट कर दे रही थी। इससे जिले में खरीद प्रभावित हुई थी।
तत्कालीन डीएम ने इसको लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया था लेकिन एफसीआई के अधिकारियों के सामने इनकी नहीं चली। एफसीआई तो दूर अभी क्रय एजेंसियां एवं सहकारिता विभाग सूची जारी होने से पहले अपने-अपने चहेतों को क्रय केन्द्र दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। जबकि क्रय एजेंसियां, सहकारिता विभाग व खाद्य विभाग के सहमति से ही क्रय केन्द्रों की सूची जारी होनी है।
सूची जारी करने के लिए जिम्मेदारों के पास सिर्फ एक दिन का समय बचा है। लेकिन अभी तक स्थिति यह है। इसके चलते किसान परेशान हैं कि उनकी उपज की खरीद होगी कि नहीं।