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मंडल में एफसीआई ने नहीं खरीदा एक छटांक धान

Deoria Updated Wed, 11 Dec 2013 05:42 AM IST
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देवरिया। धान में डैमेज का सरकारी मानक तीन फीसदी का हवाला देकर भारतीय खाद्य निगम ने गोरखपुर मंडल में धान खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। अभी तक गोरखपुर मंडल में एफसीआई के चार क्रय क्रेंद्रों पर एक छटांक धान भी नहीं खरीदा है। धान खरीदने से क्रय केंद्र एजेंसियों के दूर भागने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। हालत यह है कि दो माह बाद में प्रदेश की धान क्रय एजेंसियाें ने महज दो फीसदी ही धान खरीदा हैं।
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जिले में धान क्रय की हालत बेहद खराब है। किसानों का धान खरीदने में एजेंसियों पीछे भाग रहीं हैं। इसके कारण बैतालपुर, गौरीबाजार, तरकुलवा, देसही देवरिया और भाटपाररानी इलाके में धान बेचने को किसान परेशान हैं। हालत यह है कि केंद्र सरकार की एजेंसी भारतीय खाद्य निगम का देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर में चार क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इन क्रय केंद्रों पर एक छटांक धान नहीं खरीदा जा सका है। जबकि इनका मंडल में 13 हजार मैट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है। इसके लिए संभागीय खाद्य नियंत्रक गोरखपुर ने सामान्य प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम लखनऊ को पांच दिसंबर को पत्र लिखकर खरीदारी को कहा है। जिले के 77 क्रय केंद्रों में 30 क्रय केंद्रों पर ही धान खरीद हो रही है। जिसमें हाट शाखा के नौ, पीसीएफ के 46 में छह, यूपीएसएस के दस में छह, एनसीसीएफ के तीन में दो, यूपी एग्रो के तीन, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच में चार जगहों पर धान की खरीद हो रही है। इसमें एफसीआई के अड़ंगा से किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। धान में अपरिपक्व व संकुचित (डैमेज) दाने मानक से ज्यादा होने का हवाला देकर उन्हें क्रय केंद्रों से लौटाया जा रहा है। फिलहाल, एफसीआई का मानक तीन फीसदी डैमेज तक खरीदने का है। वर्तमान में केेंद्रीय कृषि मंत्रालय, एफसीआई की केंद्रीय टीम ने धान के नमूने में 5.1 प्रतिशत तक धान में डैमेज होना पाया है। जबकि धान क्रय एजेंसियां 4.5 प्रतिशत तक डैमेज में छूट देने की मांग कर रही हैं।
इनसेट में
एफसीआई की मैनुअल जांच पर सवाल
देवरिया। केंद्रीय टीम की जांच का तरीका मैनुअल यानि आंखों से देखकर ही अनुमान पर आधारित है। ऐसे में धान से प्राप्त हो रहे चावल में डैमेज का अनुमान लगाना कठिन है। केवल अनुमान के आधार पर पिन प्वाइंट, फंगल डैमेज के आधार पर रिजेक्ट करना सवालों के घेरे में हैं। एफसीआई इसी को आधार बनाकर धान क्रय एजेंसियों से चावल लेने से दूर भाग रही है।
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इनसेट में
जिले में कुल 71 राइस मिलर हैं जो धान की कुटाई करते हैं। तीन मिलरों के पास आधुनिक सोल टेक्स मशीन से धान की कुटाई होती है। इससे चावल में डैमेज होने का प्रतिशत घट जाता है। बाकी मिलरों के पास आधुनिक मशीन नहीं होने से डैमेज 4.5 प्रतिशत तक हो रहा है।
इनसेट में
जिले में धान खरीद का लक्ष्य 80 हजार मीट्रिक टन।
जिले के 77 क्रय केंद्रों में तीस पर हो रही खरीदारी।
मंडल में एफसीआई के क्रय केंद्रों पर नहीं हो रही खरीद।
अब तक 1438 मीट्रिक टन यानि 1.82 फीसदी धान की खरीदारी।
जिले में 20 लाख बोरा उपलब्ध यानि आठ लाख क्विंटल धान की हो सकती है खरीदारी
जिले में 3.5 करोड़ रुपये उपलब्ध
कोट-
क्रय केंद्रों पर धान की आवक कम है। जो किसान धान लेकर आ भी रहे हैं। उनका धान मानक के अनुरूप नहीं है। केंद्रीय टीम नमूना लेकर गई है। उस आधार पर कुछ छूट होगा तो धान की खरीद में तेजी आएगी।
अखिलेश्वर ओझा, क्षेत्र प्रबंधक एफसीआई गोरखपुर
कोट-
एफसीआई वाले सहयोग नहीं कर रहे हैं। मानक का हवाला देकर चावल लेेने से मना कर रहे हैं। आठ गाड़ियां चावल भेजा गया। इसमें तीन गाड़ियों का चावल लिया। लेकिन उसका प्राप्त करने का कागज नहीं दिया। दबाव बनाया जा रहा है।
राजकेश्वर, धान क्रय प्रभारी/एडीएम वित्त एवं राजस्व
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