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गांवों को जानने आए हैं विदेशी युवा

Deoria Updated Sat, 04 Jan 2014 05:44 AM IST
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बैतालपुर। विदेशी युवाओं को भारत की संस्कृति और परंपरा में दिलचस्पी है। उद्यमिता कार्यक्रम के बहाने जागृति सेवा संस्थान उन्हें भारतीय गांवों को नजदीक से जानने और समझने का अवसर दे रही है। जागृति रेलयात्रा में शामिल विदेशी युवा और युवतियों ने अमर उजाला से बातचीत में अपने मन की बात कही। लंदन की सराह हिक्सन कहती हैं कि उन्हें फोटोग्राफी करने का शौक है। अपने देश के अलावा विदेशों में सामाजिक रहन-सहन और तौर तरीकों से वह भलीभांति परिचित होने के लिए यात्रा में शामिल हुई हैं। हांगकांग के इयनक्वांग का कहना है कि वह खुद एक व्यवसायी हैं, इनका इलेक्ट्रानिक कंपनी है। वह उद्यमिता के क्षेत्र में अलग कदम रखने के लिए इस यात्रा में शामिल हुए हैं। भारतीय गांवों की संस्कृति और अन्य उद्यमियों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए वह स्वयं को जागरूक करना चाहते हैं। स्वीडन की मिरिंडा कहती हैं कि भारत में स्वरोजगार के अवसर कैसे होते हैं, इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं। इसकी जानकारी इस यात्रा से मिल रही है। यूएसए की हैरी कहती हैं कि वह पेशे से शिक्षक हैं। उनका अपना विद्यालय है। हर उम्र के बच्चों के बीच रहकर तालीम देना उनकी दिलचस्पी है। भारत में शिक्षा के प्रति कैसे-कैसे दृष्टिकोण हैं। सरकार कितनी प्रभावी है, इन चीजों को वह जानना चाह रही हैं। इंग्लैंड की सराह फ्रासर कहती हैं कि वह यूरोपीय देश में एनजीओ में काम करती हैं। उनका खुद का कंसलटेंसी कंपनी है। इस बाबत कार्यकारी निदेशक आशुतोष ने बताया कि देहात इलाके के सभी 60 प्रतिशत युवाओं को स्कॅालरशिप देकर यात्रा पर लाया गया है। शहरी क्षेत्र के युवाओं से 46500 रुपये जमा कराया गया है। इस यात्रा में कई बड़ी निजी कंपनियां सहयोग कर रही हैं।
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