एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

165 विस्थापित परिवारों के लिए 93.72 लाख स्वीकृत

Deoria Updated Thu, 27 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

देवरिया। परसिया कूरह के बाढ़ विस्थापित 165 परिवारों को बसाने के लिए शासन ने 93.72 लाख रुपये स्वीकृत किया है। इस धन से 6.6 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। राजस्व अनुभाग-10 की सचिव एवं राहत आयुक्त लीना जौहरी ने डीएम को जमीन खरीदकर निशुल्क आवंटन करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बरहज का परसिया कूरह गांव अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है। घाघरा और राप्ती नदियों के कहर से अब तक सैकड़ों मकान और खेती योग्य जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। डीएम शरद कुमार सिंह ने सात अगस्त को 165 विस्थापित परिवारों को बसाने/पुनर्वासित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर शासन ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। सचिव एवं राहत आयुक्त लीना चौधरी ने कहा है कि इन परिवारों को दूसरी जगह बसाने/पुनर्वासित करने के लिए 6.6 एकड़ (2.675 हेक्टेयर) जमीन की जरूरत है। जिसे वर्तमान में लागू स्टांप दर 3500 रुपये प्रति एअर की दर से रुपये 93.625 लाख रुपये और जमीन के रजिस्ट्रेशन के लिए 10020 रुपये को शामिल करते हुए 93 लाख 72 हजार 520 रुपये स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत धनराशि का व्यय सुसंगत नियम और शासनादेश के अनुसार नियमानुसार किया जाएगा। उपयोगिता प्रमाण पत्र भी शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा। यदि धनराशि बचती है तो कोषागार में तत्काल जमा कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। इस धनराशि का उपयोग अन्य किसी भी विभागीय कार्य के लिए नहीं किया जाएगा।

फोटो समाचार
सरकारी भवनों में रहना मजबूरी
परसिया कूरह के कटान विस्थापितों का हाल
100 से अधिक परिवार रह रहे हैं स्कूलों में
अमर उजाला ब्यूरो
बरहज। परसिया कूरह गांव के सैकड़ों परिवार कटान से विस्थापित हैं। कुछ तो खुद के प्रयास से घर बना लिए लेकिन कुछ के लिए अपना घर सपना ही है। सात वर्षों से कटान विस्थापित 100 से अधिक परिवार स्कूलों, सरकारी भवनों और रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। स्कूल भवनों के एक कमरे में सिमटी जिंदगी की डगर एक अद्द घर के लिए कठिन हो गई है।
विज्ञापन

परसिया कूरह गांव के लोग वर्ष 2007 से कटान से विस्थापित हो रहे हैं। करीब 600 परिवार विस्थापित हुए हैं। विस्थापित लोगों में मात्र 32 लोगों को पट्टे आदि की भूमि देकर बसाया गया है। कुछ लोग खुद की जमीन अथवा क्रय कर अपने घर बना लिए हैं। अब भी सैकड़ों परिवार विद्यालय, सरकारी भवनों, रिश्तेदारों के यहां रहने को विवश हैं। एसडीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि भूमि क्रय के लिए गए प्रस्ताव की स्वीकृति मिली है। भूमि क्रय कर बसाने का कार्य किया जाएगा।

फोटो समाचार
जब अपना घर न हो तो जिंदगी कैसी
बरहज। कटान से विस्थापित हुए परिवार एक-एक कमरे के सरकारी भवन में रहने को विवश हैं। बच्चों और परिवार के साथ गुजर करना आसान नहीं रह गया है। सबसे मुसीबत उन परिवारों के सामने हैं जो खेती, मजदूरी पर निर्भर हैं। जहां रह रहे हैं वहां पानी, बिजली और सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। ठंड की रात में उनके लिए यह बड़ी मुसीबत है।
कपरवार के कन्या प्राथमिक विद्यालय में रह रही शहाबुद्दीन, लियाकल अली, कबूतरी देवी, साहिना बताती हैं विस्थापित हुए चार माह होने जा रहा है। लेकिन अभी तक कोई प्रबंध नहीं हो सका है। जाड़े में गुजर करना बड़ी मुसीबत है। खेदन प्रसाद, कलावती, फुलावती, शारदा, दशरथ सिंह कहते हैं कि आज की महंगाई के दौर में हम अपने घर की उम्मीद छोड़ दिए हैं। जमीन खरीदना और मकान बनाने की महंगाई आसान नहीं है। बच्चों का पेट भर रहा यही बड़ी बात है। यहां न तो बिजली है और न ही पीने का शुद्ध पानी। किसी प्रकार परिवार को शरण मिली है। कोटे का राशन लेने के लिए यहां से बेलडाड़ जाना पड़ता है। विस्थापित लोगों ने प्रशासन से जल्द बसाए जाने की मांग की है।

परसिया कूरह 2007 से हो रहा कटान
गांव में 200 घरों में बचे हैं 10 मकान
1400 लोगों की थी गांव की आबादी
600 परिवार हुए हैं विस्थापित
100 परिवारों को अब भी है सहायता की दरकार

विद्यालयों की अलग समस्या
बरहज। नगर सहित कपरवार, बारा दीक्षित, बेलडाड़, कटइलवा के सरकारी स्कूलों, पंचायत भवनों, सामुदायिक भवनों में बाढ़ विस्थापितों को प्रशासन ने शरण दी है। सबसे मुसीबत स्कूलों को है। इनके रहने से वहां का पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। परिसर में ही पशुओं आदि के रहने से बच्चों और शिक्षकों को भी कठिनाई हो रही है।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें