देवरिया जेल में बवाल की पटकथा सोमवार रात को ही लिख दी गई थी। सुबह उसे अंजाम देना था। बनारस की तर्ज पर बंदी बवाल करना चाहते थे। उनके टारगेट पर जेल अधीक्षक रंग बहादुर पलेट थे। शातिर बदमाशों की मंशा मुट्ठी बंदीरक्षक नहीं भाप पाए। जिससे जेल प्रशासन की नाकामी माना जा रहा है।
जेल में दूसरे जिले से आए बदमाश वर्चश्व जमाना चाहते हैं। सहूलियत और सुविधा की मांग बंदी लगातार कर रहे थे। लेकिन जेल अधिकारियों की लगातार सख्ती ने सभी को बागी बना दिया। नतीजा यूपी की सुरक्षित जेलों में शुमार देवरिया जेल जल उठी। जेल में आग लगाने के अलावा कई बैरकों में तोड़फोड़ की गई। चार घंटे तक जेल उपद्रवियों के कब्जे में रही। चार सौ पुलिसकर्मी बनाम चौदह सौ बंदी। इस स्थिति में हालात बद से बदतर हो गए।
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लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने करीब बीस उपद्रवियों को चिन्हित किया जिन्होंने तय रणनीति का खुलाया किया। सूत्रों की माने तो बंदियों का नेतृत्व कर रहे अपराधी जेल अधीक्षक पर हमले की फिराक में थे। वह बनारस जेल की तरह उत्पात कर जेल पर धौंस जमाने की बात कह रहे थे। विवाद की सुनियोजित कड़ी देखकर पुलिस दंग रह गई। जेल में भड़की आग अभी शांत नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए है। विवाद करने वाले शातिरों को चिहिन्त कर गैर जनपद भेजा जाएगा।