एटा। पर्व से पूर्व वेतन-बोनस भुगतान के आदेश जनपद में दम तोड़ रहे हैं। बोनस तो दूर जनपद के हजारों शिक्षक-कर्मचारियों, कृषि विभाग आदि को गत माह का वेतन नहीं मिल पाया है। प्राथमिक शिक्षक तो सितंबर माह के वेतन की वाट निहार रहे हैं।
प्रशासनिक अव्यवस्थाएं त्योहारों की खुशियों पर भारी पड़ रही हैं। महंगाई से जूझ रहे कर्मचारियों को बोनस तो दूर वेतन भी नहीं मिल पा रहा। शासन जहां पर्व से पूर्व वेतन एवं बोनस भुगतान को तोहफा बता कर घोषणाएं कर रहा है। वहीं अभी तक उनकी झोली खाली है। सनी, राजेंद्र सिंह, मनोज, राजेश यादव आदि शिक्षकों का कहना है कि बोनस व अक्तूबर माह का वेतन तो दूर उन्हें अभी तक सितंबर का भी वेतन नहीं मिला है। ऐसे में पर्व की तैयारियां दूर की कौड़ी बन गई है। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. दिनेश वशिष्ठ, एसएस बघेल आदि का कहना है कि पर्व से पूर्व बोनस के आसार नहीं हैं। अक्तूबर का वेतन मिल जाए यही बहुत है। कृषि विभाग के दर्जनों कर्मचारी भी वेतन न मिलने से परेशान हैं। सुधीर तोमर बताते हैं कि नई भुगतान व्यवस्था के चलते गत माह का वेतन भी खतरे में पड़ा है। लहसुन ने छीनी पर्व की खुशियां। जनपद के किसानों को लहसुन रुला रहा है। करोड़ों का उत्पादन करने वाले जनपदीय किसान इसकी दुर्गति पर आंसू बहा रहे हैं। हजारों किसानों की तो लागत भी नहीं निकली। वे कर्ज में डूब चुके हैं। ककैरा निवासी अनिल यादव बताते हैं कि महीनों के इंतजार के बाद भी लागत मूल्य नहीं मिल रहा। किसान रामचरन, दयाराम शाक्य का कहना है कि आलू, लहा आदि की बुवाई में जुटे किसान के पास पैसे का अभाव है। धान की बिक्री नहीं हो पाई है।