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शहर का परिवार केदारनाथ में फंसा

Etah Updated Wed, 19 Jun 2013 05:30 AM IST
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एटा। उत्तरांचल में बारिश और बाढ़ के कहर में शहर का भी एक परिवार फंस गया है। भूस्खलन और बादल फटने से इनकी टैक्सी पानी में बह गई। वहीं, यह लोग गौरी कुंड पर फंसे हैं। इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस इनकी सुरक्षा एवं सहायता में जुटी है। दो दिन बाद हुए दूरभाष संपर्क के अनुसार चालक और तीर्थयात्री परिवार सुरक्षित है।
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चार धाम की यात्रा पर गए शहर के व्यवसायी परिवार के पांच सदस्य देवभूमि के बाढ़ बारिश में फंस गए हैं। कचहरी रोड निवासी परिवार के छोटे भाई मनोज वार्ष्णेय ने बताया कि नौ जून को भाई विनीत वार्ष्णेय, भाभी भावना वार्ष्णेय, भतीजे राम, हर्ष और भतीजी राची के साथ टैक्सी से चार धाम की यात्रा के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ अलीगढ़ निवासी उनके साढू का परिवार भी है। तीन धामों की यात्रा पूरी करने के बाद वे केदार नाथ धाम की यात्रा कर वापस लौट रहे थे। तभी कहर बनी बारिश और बाढ़ ने सुखद यात्रा का अनुभव उलट दिया। गौरी कुंड पर खड़ी टेक्सी पानी में बह गई। और 16 जून को यह लोग वहीं फंस गए। इतना ही नहीं ध्वस्त दूरसंचार व्यवस्थाओं के चलते इनका परिवार से संपर्क भी टूट गया। मनोज के अनुसार सोमवार से संपर्क न होने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। टीवी पर आ रही खबरों से और भी बुरा हाल था। लेकिन मंगलवार को भाभी से हुई बात के बाद सबकी जान में जान आई। और पता चला कि आईटीबीपी के हेलीकॉप्टर की मदद से महिलाओं एवं बच्चों को फाटा स्थित सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। जबकि भाई विनीत व अन्य पुरुष अभी भी वहीं फंसे हैं। सुरक्षा बल इनकी सहायता एवं व्यवस्था में जुटे हैं। भाभी के अनुसार यहां तबाही का खौफनाक नजारा है।


केदारनाथ धाम में हुई मौत
एटा (ब्यूरो)। चार धाम की यात्रा पर गईं चिकित्सक की 35 वर्षीय पत्नी अनुपम पांडेय का हृदय गति रुकने से केदारनाथ में देहांत हो गया। केदारनाथ धाम के दर्शन को जाते हुए मंदिर की सीढ़ियों पर शुरू हुआ दर्द जानलेवा बन गया। तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें वहां अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। पति व आधा दर्जन परिजनों के साथ चार धाम की यात्रा पर रवाना हुई मृतक बद्रीनाथ की यात्रा कर चुकी थीं। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार केदारनाथ में ही कर दिया गया। पति डा. कुलदीप पांडेय का कहना है कि धार्मिक प्रवृत्ति की अनुपम सदैव पूजा पाठ एवं तीर्थयात्रा की चाह रखती थीं। उन्हें क्या पता था कि उनकी मृत्यु भी तीर्थ स्थल पर ही होगी।
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