एटा। शासन की उपेक्षा कहें या रोजगार का कमी। जिले में मजदूरों के हालात नहीं सुधर रहे। रोजी-रोटी को मोहताज हो रहे इन लोगों को मनरेगा और अन्य शासकीय योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा।
पिछड़े और उद्योग विहीन जनपद में बेरोजगारों की भरमार है। कुछ समय तक नौकरी के सपने देखने वाले यह बेरोजगार मजबूर होकर मजदूरों की जमात में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में जनपद में हर दिन मजदूरों की फौज बढ़ती जा रही है। दिनभर पसीना बहाकर रोजीरोटी कमाने वाले इन लोगों को शासकीय श्रम योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं विभागीय मानक और निर्देशों की जानकारी के अभाव में इनका शोषण भी हो रहा है। बताते चलें कि जनपद में जहां हजारों कुशल मजदूर हैं। वहीं, अकुशल मजदूरों की संख्या इससे कई गुनी है। रोजगार के अभाव में जिले के हजारों मजदूर दिल्ली, शिमला, देहरादून, मुंबई तक जा रहे हैं।
--------
बड़ौदा में एटा की धमक
एटा (ब्यूरो)। बड़ौदा में संचालित ईंट उद्योग में एटा के लोगों की धाक है। मजदूरी करने गए दर्जनों लोग मेहनत की दम पर उद्योगपति बन गए हैं। भरगैन सहित जनपद के हजारों लोग वहां जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। लोगों की मानें तो यहां के लोगों की पूरी बस्ती है।
--------
मजदूर दिवस भी सूना
एटा (ब्यूरो)। श्रम विभाग की उदासीनता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मजदूर दिवस पर भी श्रमिकों की जागरूकता के लिए कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जा रहा। इस बार चुनावों की मजबूरी मान भी लें लेकिन पहले भी यह दिन सूना ही गुजरता रहा है।
बालश्रम पर भी अंकुश नहीं
एटा। श्रम विभाग भी बालश्रम एवं श्रमिकों का उत्पीड़न नहीं रोक पा रहा। श्रमिकों की शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा। विभागीय आदेश के बाद भी शहर में साप्ताहिक बंदी नहीं हो रही। श्रमिकों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इसकी शिकायतें भी हुई हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
समय-समय पर मजदूर जागरूकता के आयोजन किए जाते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश और अन्य सन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित पंद्रह योजनाओं का लाभ भी पात्रों को मिल रहा है। बीते दो वर्षों में पांच सौ से अधिक पंजीकृत मजदूरों व उनके परिवारों को इसका लाभ मिल चुका है। बाजार बंदी के दिन अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। वहीं, बालश्रम तोड़ने वालों पर भी शिकंजा कसा है।
- चंद्रभान, जिला श्रम प्रवर्तन अधिकारी, एटा