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कड़ी सुरक्षा में बांटी गई डीएपी

Hamirpur Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
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मौदहा (हमीरपुर)। मंगलवार को क्रय-विक्रय समिति में डीएपी खाद की बोरियां आते ही कुछ घंटों में साफ हो गई। खाद की भनक लगते ही किसान सुबह से ही लाइन लगाए थे। खाद के लिए धक्का मुक्की और अव्यवस्था फैलने पर पुलिस की मदद लेनी पड़ी। पुलिस की तैनाती के बाद खाद का वितरण हो सका।
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मौसम साफ होते ही किसान लाही की बुआई करने में जुट गए है। इस वर्ष तिलहन के रेट अच्छे होने व गेहूं की सरकारी खरीद में परेशान किसान गेहूं की फसल बोने से मुंह मोड़ रहे है और लाही की बुआई के लिए तैयारी करने में जुटे है। खाद बीज मिल पाए इसके लिए समितियों के चक्कर लगा रहे है। सहकारी समितियों मेें आने वाली खाद पर विभागीय नियंत्रण इस कदर हावी है कि 1500 बोरी खाद अगस्त में कसबे की किसान सेवा समिति पर आई थी लेकिन 900 बोरी खाद रिजर्व कर दी गई। जिसे पहली अक्तूबर से वितरण करने के निर्देश दिए गए। इसके चलते शेष 600 बोरी खाद का ही वितरण हो सका। उधर क्रय विक्रय समिति में नकद खाद बिक्री की जा रही है। रविवार को 1500 बोरी डीएपी खाद का ट्रक जैसे ही आया। सोमवार को किसान खाद के लिए चक्कर लगाने लगे। मगर कल पुलिस की व्यवस्था नहीं होने से इसका वितरण नहीं हो सका। मंगलवार को सुबह से ही सैकड़ों किसान समिति में आ गए। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में खाद का वितरण किया गया। मात्र तीन घंटे में खाद की बोरियां खत्म हो गईं। प्रत्येक किसान को पांच बोरी से अधिक खाद नहीं दी गई।
मनमानी कर रहे अधिकारी
मौदहा। क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष रहे रईस अहमद का कहना है कि बीते वर्ष उनके द्वारा लगातार किए गए प्रयास से 1 करोड़ की खाद किसानों को बेंची गई थी। लेकिन अब सहकारी के चुनाव होने की घोषणा से अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा हो गया है। ऐसे में सुनने वाला कोई नहीं है। अधिकारी मनमानी कर रहे है। स्थित यह है कि किसान बुआई करने लगा है। जबकि समिति में अभी तक मात्र 3 हजार बोरी ही खाद आ सकी है। जबकि 30 एमटी खाद के लिए चेके जमा की जा चुकी है।
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शासन की छवि की जा रही धूमिल
मौदहा। कसबा स्थित क्षेत्र की सबसे बड़ी क्षेत्रीय सहकारी समित में अध्यक्ष रहे इदरीश खान का कहना है कि उनके प्रयास से बीते वर्ष 50 लाख की कीमत से खाद का व्यवसाय किया गया। तब अकेले अगस्त महीने में 1400 बोरी खाद वितरित की गई। इस वर्ष मात्र 600 बोरी ही खाद बांटी जा सकी है। कहा कि शासन के स्पष्ट निर्देश है कि किसानों को खाद बीज के लिए परेशान न किया जाए। लेकिन कुछ अधिकारी शासन को बदनाम करने के लिए बंपर स्टाक के बावजूद समितियों में खाद नहीं भेज रहे है। दावा किया कि पीसीएफ के भंडार में खाद का पर्याप्त स्टाक है।
समय से तिलहन नहीं बोई तो चली जाएगी नमी
मौदहा। कसबे के हैदरगंज मोहल्ला निवासी किसान छिद्दू चौधरी का कहना है कि सरकार वादे तो तमाम करती है और सहकारिता व कृषि विभाग अच्छी तरह जानता है कि खेत में बुआई का जैसे ही समय आता है उसे नहीं रोका जा सकता है। बुआई में देरी होने पर खेत की नमी उड़ जाती है। ऐसे में किसानों को पलेवा का सहारा लेना पड़ता है। इससे किसानों का खर्च भी बढ़ जाता है। जबकि इसके लिए पहले से ही प्रबंध होने चाहिए। खुले बाजार में मिलने वाली खाद पर किसानों को विश्वास नहीं है। किसान खेती के कार्य में धोखा नहीं खाना चाहता है।
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