तारों की चिंगारी से जले 80 बीघा गन्ने
का 5 साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
बिजली निगम के अफसर कितने घाघ हैं, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब पांच साल पहले 11 हजार वोल्ट की लाइन से निकली चिंगारी से जली 80 बीघा गन्ने की फसल का मुआवजा आज तक पीड़ित किसानों को नहीं मिल सका है।
तमाम औपचारिकताएं पूरी कराने में किसानों की उम्र गुजर रही, लेकिन अफसरों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला तो वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से फरियाद करेंगे।
दरअसल, बिजली निगम हापुड़ के अधीन आने वाले धीरखेड़ा बिजलीघर से ग्राम कैली ब्लाक खरखौदा जिला (मेरठ) को भी बिजली की सप्लाई होती है।
बताया गया है कि दिनांक 23 सितंबर 2013 को दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक 11 हजार वोल्ट की लाइन के तार आपस में टकरा गए, जिनसे निकली चिंगारी ने दीपक पुत्र नरेश के गन्ने के खेत में आग पकड़ ली।
कुछ ही देर में आसपास स्थित गन्ने के खेतों में आग लग गई। परिणामस्वरूप रामेश्वर पुत्र मोमराज त्यागी, रघुनन्दन सिंह पुत्र रामशरण त्यागी, राम प्रकाश, बालकराम, रामपाल, रामअवतार व ओमपाल पुत्र गोवर्धन त्यागी समस्त निवासी ग्राम कैली की कुल 80 बीघा गन्ने की फसल आग की चपेट में आ गई।
आनन फानन में 100 नंबर पर सूचना दी गई लेकिन फायरब्रिगेड की गाड़ियाें के पहुंचने तक लगभग 15 लाख रुपये की गन्ने की फसल जल गई। मामले की दीपक की ओर से खरखौदा (मेरठ) में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इतना ही नहीं बिजली निगम हापुड़ के अधिकारियों और धीरखेड़ा बिजलीघर पर भी सूचना दी गई। बाद में किसानों ने बिजली निगम के अधिकारियों से किसानों ने मुआवजा मांगा।
इस मामले में जेई, एसडीओ, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, प्रमुख अभियंता, उप निदेशक विद्युत सुरक्षा, लेखपाल, तहसीलदार समेत अनेक अधिकारियों की रिपोर्ट लग चुकी हैं और विभाग की लापरवाही सामने आई है। इसके बावजूद मुआवजा नहीं मिला।
अब अधिशासी अभियंता सचिन कुमार ने जेई एसडीओ से फिर मौके का नक्शा बनाकर रिपोर्ट देने को कहा है। कुल मिलाकर हालत यह है कि पांच साल से भागते किसानों के जूते टूट चुके हैं, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।
इसीलिए पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला तो वह लोग लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में फरियाद लगाएंगे।
मेरे स्तर से इस तरह की कोई फाइल नहीं रोकी गई है। हो सकता है कि फाइल में कुछ कमियां रह गई हों, जिस कारण मुआवजा नहीं मिल सका है। वह इस मामले की फाइल तलब कर जांच कराएंगे।
- बीएल मौर्य, अधीक्षण अभियंता