आखिर कब सच होगा विकास का सपना?
विकास और जनहित से जुड़ीं योजनाओं पर कोई खास अमल नहीं हो पाया
कुलदीप भारद्वाज
गढ़मुक्तेश्वर। दिन गुजरे, माह गुजरे और देखते ही देखते गुजर गया वर्ष 2017। लेकिन गंगानगरी की बदहाली अभी भी जस की तस है। वर्ष 2017 के शुरू में गढ़ की जनता को काफी उम्मीदें थी। बहुत सी योजनाएं आई भी लेकिन धरातल पर योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अब जनता 2018 में गंगानगरी के विकास की बांट जोहती नजर आएगी।
वर्ष 2001 में हरिद्वार के नवगठित उत्तराखंड राज्य में शामिल होने पर प्रदेश शासन ने सदियों से उपेक्षित गढ़-ब्रजघाट तीर्थनगरी को विकसित कराने की घोषणा की थी। घोषणा को 16 वर्ष गुजर चुके है लेकिन अभी तक इस पर उपेक्षित स्तर से कोई कार्य नहीं हो सका। प्रथम चरण में जीडीए और एचपीडीए ने परिक्रमा पथ, श्मशान घाट का सुंदरीकरण, नाव स्टैंड, घंटाघर, महिला चेंज रूम समेत इक्का-दुक्का स्थानों पर सड़कों का निर्माण करने के बाद कोई खास रंग नहीं दिखाया है। सीएम अखिलेश यादव ने 10 नवंबर 2012 को मेरठ आगमन पर गढ़-ब्रजघाट गंगानगरी को पर्यटक स्थली के रूप में विकसित करवाने की घोषणा की थी, जिसको लेकर करीब पांच हजार करोड़ रुपये से होने वाली विकास योजनाओं का खाका तैयार किया गया था, जिसमें तीन साल पहले गंगा किनारे पक्के स्नानघाट बनाने को महज पांच करोड़ की पहली किस्त जारी हो पाई थी। इसके बाद भी हाईवे किनारे ट्रॉमा सेंटर, कल्याणपुर झील में डिज्नीलैंड, चार सौ केवी क्षमता वाला बिजलीघर, जलवायु परिवर्तन केंद्र, सीआईएसएफ ट्रेनिंग सेंटर, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, कृषि अनुसंधान केंद्र, खेल स्टेडियम जैसी कई जनहित वाली योजनाओं का लाभ मिल पाना फिलहाल मुमकिन नहीं हो पाया है। इसके अलावा पांच जुलाई को सीएम योगी ने ब्रजघाट का दौरा कर हरिद्वार की तर्ज पर विकास कराने की घोषणा की थी, लेकिन फिलहाल इस बाबत कोई योजना चालू नहीं हो पाई है। कुल मिलाकर सियासी दावे और वादों के बाद भी मुक्ति धाम के रूप में विख्यात गंगानगरी की कायापलट होने का सपना अपेक्षित स्तर पर परवान नहीं चढ़ पा रहा है।
क्षेत्रीय विधायक कमल मलिक का कहना है कि हाईवे किनारे ट्रॉमा सेंटर की आधारशिला रखी जा चुकी है और सिंभावली में स्टेडियम के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है, जबकि हरिद्वार की तर्ज पर विकास समेत जनहित से जुड़ीं कई प्रस्तावित योजनाओं पर नए साल में अमल चालू कराया जाना है।
तहसीलदार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि विकास और जनहित से जुड़ीं अधिकांश प्रस्तावित योजनाओं के लिए भूमि की तलाश की हुई है, जिससे आगामी वित्तीय वर्ष में कई योजनाओं पर अमल चालू होने की संभावना है।