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बनारस में घोषणा गढ़ में उम्मीदों की हिलोर

Hapur Updated Mon, 19 May 2014 05:30 AM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। मोदी का बनारस में आरती के दौरान गंगा की सुध लेने की घोषणा से ब्रजघाट की तस्वीर बदलने की उम्मीद बंध गई है। भक्तों का मानना है कि जब तक गढ़ में गंगा साफ-सफाई नहीं होगी तब तक बनारस में निर्मल गंगा का सपना परवान चढ़ना संभव नहीं है।
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बता दें कि बनारस में नामांकन के दौरान भी नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ‘सच पूछो तो मैं यहां आया नहीं हूं मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’। अब महाविजय के बाद मोदी का पीएम बनना तय है। शनिवार को भी बनारस की गंगा आरती में शामिल होेकर मोदी ने अपने भाग्य में गंगा की सेवा करने का सौभाग्य लिखा होने का उल्लेख कर मोक्ष दायिनी की तस्वीर बदलने का दावा किया था। इसके बाद गढ़-गंगा की तस्वीर बदलने की आस भी फिर से हिलोरे मारने लगी है। हालांकि सिंभावली, स्याना और गजरौला की औद्योगिक इकाइयों का जहरीला और आवासीय क्षेत्रों का दूषित पानी बेरोकटोक गंगा में गिर रहा है। इसके चलते मानवमित्र डॉल्फिन समेत दुर्लभ प्रजाति के जलीय जीवों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। इसके लिए किसान नेता कृष्णकांत हुण की ओर से कानूनी लड़ाई भी जारी है। इसमें हुण को सफलता भी मिली है।

तीर्थ पुरोहित मनोज शर्मा का कहना है कि केंद्र में नई सरकार बनने से गंगा के दिन संवरने की आस जग गई है। इसकी शुरुआत भी मोदी बनारस में कर चुके हैं।
पंडित अशोक शर्मा का कहना है कि फैक्ट्री और बस्तियों का दूषित पानी गंगा में गिरना गंभीर समस्या है, जिसकी रोकथाम को लेकर नई सरकार से उम्मीदें हैं।
पंडित विनोद कुमार का कहना है कि मोदी ने बनारस में गंगा की सेवा करने की जो घोषणा की है, उससे ब्रजघाटके दिन भी संवरने तय हो गए हैं। क्योंकि बनारस से पहले दूसरे स्थानों पर गंगा को सफाई करानी होगी।
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पंडित राजेंद्र नागर कहते हैं कि गंगा देश की खुशहाली की प्रतीक है। इससे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। इसलिए मोदी ने गंगा को निर्मल करने की घोषणा करने का सराहनीय कदम उठाया है।
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