हरदोई। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2011-12 में छात्राओं के बैग वितरण में हुए खेल की पोल खुल गई है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे आडिट कार्य में मानकों का पालन न किए जाने की बात सामने आई है। इस संबंध में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा से जवाब मांगा गया है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत बालिका शिक्षा योजना में बालिकाओं को विद्यालयों की तरफ आकर्षित करने के लिए गत शैक्षिक सत्र में परिषदीय प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्राओं को निशुल्क स्कूली बैग दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। 90 रुपए की कीमत के इस बैग को प्राथमिक विद्यालय की करीब दो लाख 13 हजार 766 छात्राओं तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की करीब 69 हजार 921 छात्राओं को स्कूली बैग दिए गए थे। इसके लिए करीब दो करोड़ 55 लाख 31 हजार 830 रुपए खर्च किए गए। इस धनराशि को ग्राम शिक्षा निधि के खातों में भेज कर प्रधान व प्रधानाध्यापक को संयुक्त रूप से बैग खरीदे गए थे। इसके लिए माडल भी बनवाए गए।
व्यवस्था थी कि छात्राओं को जो बैग दिए जाएं उनके माडल बीआरसी व जिला मुख्यालय पर नमूना के लिए रखे जाएं। हालांकि अधिकारियों ने बैगों के नमूना सुरक्षित रखने का दावा भी किया था। लेकिन सर्व शिक्षा अभियान की धनराशि का आडिट करने आई महालेखाकार की टीम को नमूने नहीं मिले। आडिट के बारे में दी गई जानकारी में बताया गया कि आडिट टीम ने नमूने तलब किए तो अधिकारी बगलें झांकने लगे जिस पर टीम ने आपत्ति जताई और जिला समन्वयक बालिका शिक्षा जौहरी से जवाब मांगा। इस बाबत जिला समन्वयक ने बताया कि इसमें कोई खास बात नहीं है। आडिट में जो जानकारी मांगी गई है उसका वह जवाब दे रहे हैं।