हरदोई। नुमाइश मैदान में श्रीमद्भागवत कक्षा में श्री भास्करानंद महाराज ने कहा कि हमें दूसरों से वही व्यवहार करना चाहिए जो अपने लिए पसंद है मगर लोग ऐसा नहीं करते हैं। अपनी गलती होती है तो बचाव में दलीलें देते हैं और दूसरे से गलती होती है तो उसके लिए कठोर सजा चाहते हैं यह दोहरा आचरण ही हमारे कष्टों का कारण है। जो लोग दूसरे के सुख को देख खुश होते हैं और दूसरे के दु:ख को देख दु:खी होते हैं वहीं सही मायने में शांति और आनंद की न केवल परिभाषा समझते हैं बल्कि उसे महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ही सुख और दुख का कारण बनती हैं इसलिए हम परिस्थितियों को तो बदल नहीं सकते हैं मगर खुद को बदल कर परिस्थितियाें के अनुकूल कर सकते हैं। परिस्थितियां चाहे जैसी हो हमें धैर्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों और असहाय लोगों की मदद से बढ़कर कोई काम नहीं हैं। इस मौके पर विशेष रूप से मौजूद संत सुबोधानंद महाराज नेे सदाचरण का संदेश दिया। इस दौरान अशोक श्रीवास्तव, अर्चना श्रीवास्तव, आनंद आदि मौजूद थे।