हरदोई। किसी ने क्या खूब कहा है कि ‘वक्त बदल गया है, हालात बदल गए, खून का रंग नहीं बदला, पर खून के कतरे बदल गए हैं। दिन रात नहीं बदले, मगर मौसम बदल गए, होली तो वही है, पर होली के रंग बदल गए’। इन पंक्तियाें का भावात्मक अर्थ हर आम व खास लोगों को बखूबी पता है। इसके बावजूद त्योहार का उल्लास कहीं कम तो कहीं ज्यादा दिखाई दे रहा, पर हां मनाया जरूर जा रहा है।
शनिवार को जहां बाजारों में होली के त्योहार को लेकर रौनक नजर आई और बाजारें रोशन दिखीं, वहीं स्कूलों में भी होली का पर्व खूब दिखाई दिया। टीएन किड्स स्कूल में होली उत्सव के पूर्व विद्यालय का अंतिम कार्य दिवस पर प्ले ग्रुप से कक्षा पांच तक के समस्त बच्चों ने अपने पेपरों से मुक्ति पाकर एक दूसरे सहपाठी को गुलाल से रंग कर, आपस में गले मिलकर प्रेम व सौहार्द की भावना का परिचय दिया। विद्यालय प्रबंधक अविनाश शुक्ल ने बच्चों को होली के पर्व के बाबत जानकारी देते हुए उनके मंगल जीवन की कामना की। इस मौके पर समस्त स्टाफ मौजूद रहा। उधर, होली पर खोया की मांग का मिठाई पर भारी असर पड़ा है। खोया की महंगाई से मिठाई महंगी तो हो ही रही हैं। गुणवत्ता भी प्रभावित होती जा रही है।
ऐसी हालत में बाजार में खोया की बजाय बेसन और गरी की मिठाइयां बढ़ गई हैं। तो ड्राई फ्रू ट्स की तरफ भी लोग बढ़ रहे हैं। गुझिया होली की पहचान होती हैं। छोटा हो या बढ़ा सभी गुझिया बनवाता है। हालांकि, गुझियों पर महंगाई का असर पड़ा है, पर जरूरत क ो देखते हुए खोया की मांग बढ़ जाती है। यही कारण है कि जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, खोया के भाव बढ़ते जा रहे हैं। जिसका सीधा असर खोया से बनी मिठाइयों पर पड़ रहा है। खोया की लौज अभी से खोजे नहीं मिल रही है। तो बर्फी हो या पेड़ा। दुकानों पर कम दिखाई दे रहे हैं, जो हैं वह मंहगे हो रहे हैं। साधारण बर्फी सौ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। तो अन्य मिठाइयों के भाव और ऊंचे हैं।
खोये की किल्लत से गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जिससे बेसन और गरी की मिठाइयां लोग अधिक पसंद करने लगे हैं। जिन्हें यह पसंद नहीं हैं, वह ड्राई फ्रू ट्स की तरफ बढ़ रहे हैं। जिससे मिठाई के कारोबार पर फर्क पड़ा है। हालांकि, यह एक सप्ताह के लिए ही बताया जा रहा है। मिष्ठान भंडार मालिकों का कहना है कि हर वर्ष होली पर खोया की मार झेलनी पड़ती है। दूध की कमी भी हो जाती है, जिससे दही और पनीर का भी भाव बढ़ जाता है। वहीं मेवा कारोबारी महंगाई के बाद भी मांग बढ़ने की बात कह रहे हैं।
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महंगाई की चासनी में डूब गई गुझिया
हरदोई। होली की गुझियों को महंगाई मार गई है। खोया ही नहीं, गुझियों में पड़ने वाली सभी सामग्री महंगी हो गई है। कभी खाने को बनाई जाने वाली गुझिया अबक सगुन के लिए बनाई जाती है। गुझिया बनाने के लिए मैदा हो या घी सभी महंगा हो गया है। मैदा के दाम बढ़े तो घी ने भी उछाल मारे। खोया तो रिकॉर्ड ही तोड़ रहा है। शनिवार को खोया बाजारों में ढूंढे नहीं मिला, अगर मिला भी तो तीन सौ रुपये किलो पहुंच गया है। गुझियों के लिए जरूरी मेवा रिकार्ड तोड़ रही है। जिसका असर गुझिया पर पड़ा है। घरों में खाने और मेहमानों को खिलाने को बनाई जाने वाली गुझिया केवल शगुन बनकर रह गई हैं। यही कारण है कि कभी होली के एक सप्ताह पहले से ही घरों में शुरू होने वाली तैयारी अभी तक शुरू नहीं की जा सकी है।
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कुछ इस तरह महंगी हो गई गुझिया---
खोया-300 रुपये किलो, चिरौंजी-1000, किसमिस-270, नारियल-140, रवा-24, मैदा-22, मखाना-500, रिफाइंड-90, डालडा-80
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‘आधुनिकता में जहां अन्य त्योहार और पर्वों पर उल्लास कम होता जा रहा है, वहीं होली दीपावली जैसे त्योहारों का क्रेज आज भी है, बशर्ते महंगाई लोगों के उल्लास के बीच आ रही है।’ श्वेता, गृहणी
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‘कहने की बात नहीं कि परंपराओं को सहेजने में लोगोें को अब दिक्कतें महसूस होने लगी हैं। गुझिया से लेकर अन्य पकवान आदि तैयार करने में निमभन व मध्यम वर्गीय परिवारों को भी दिक्कतें महसूस होने लगी हैं।’ विभा गृहणी
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होली के मद्देनजर बैंकों में रही ग्राहकों की भीड़
हरदोई। होली के चलते बैंकों में 16 एवं 17 मार्च को अवकाश है। जिसके चलते 15 मार्च को बैंकों में पैसा निकालने एवं अन्य कामकाज निपटाने को खासी भीड़ रही। आलम यह था कि कई बैंक शाखाओं में काफी देर तक लाइन लगानी पड़ी। शनिवार के चलते हाफ डे वर्किंग होने से भी बैंक कर्मियों पर समय से काम निपटाने का प्रेशर रहा। सुबह 10 बजे से शुरू हुआ ग्राहकों का आना देखते ही देखते भीड़ में बदल गया और साढ़े दस बजते-बजते लेन देन सहित कई काउंटरों पर लाइनें लग गई। बैंक आफ इंडिया और पीएनबी आदि में ग्राहकों की काफी भीड़ रही। शनिवार को एटीएम केंद्रों पर भी लोगों को लाइन लगानी पड़ी। निजी क्षेत्रों की बैंकों के एटीएम केंद्रों पर खासी भीड़ रही। एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक विवेक मित्तल ने बताया कि त्योहारों पर पड़ने वाले अवकाशों के चलते एटीएम के माध्यम से पैसे की निकासी काफी बढ़ जाती है। इसके कारण बैंकों को कैश अरेजमेंट से लेकर विशेष व्यवस्थाएं करनी पड़ती है।