हरदोई। जिला महिला अस्पताल में पहुुंचने वाली प्रसूताओें को प्रसव के साथ ही कई संक्रामक रोग भी मिल रहे है। एक बेड पर दो से तीन प्रसूताओं और नवजात बच्चों में संक्रामक रोगों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके साथ ही जो भोजन उनको दिया जा रहा, वह उनकी सेहत को ठीक करने के स्थान पर और खराब कर रहा है। वहीं तीमारदारों को पीने के पाने और छांव के लिए भटकना पड़ता है। जननी सुरक्षा योजना के वाहन सिर्फ कागजों में ही प्रसूताओं की सेवाओं में लगी हुई है। जिम्मेदार सभी को बेहतर होने दावा कर पल्ला झाड़ रहे है।
ज्ञात हो कि जिला महिला अस्पताल का भवन बनने से वह विगत एक साल से गन्ना नेत्र अस्पताल मेें संचालित हो रहा है। अस्पताल को स्थानांतरित करने के दौरान मरीजों को सुविधाएं देने के लिए करीब दस से 15 लाख रुपये मरम्मत आदि में व्यय किया गया था, ताकि आने वाले मरीजोें को बेहतर लाभ मिल सके। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओें को लाने ले जाने को नि:शुल्क वाहन की सुविधा मुहैया है। इसके साथ ही प्रसव के दौरान भर्ती होने वाली महिलाओें को मीनू के अनुसार पौष्टिक आहर देने का प्राविधान है। इसके साथ ही संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओें केा जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रोत्साहन की धनराशि भी उपलब्ध कराई जाती है।
पर, अस्पताल में सुविधाएं तो दूर मरीजों का हाल लेने वाला कोई नहीं है। यहां मरीज बाहरी लोगोें के भरोसे रहते हैं। महिला अस्पताल में प्रसूताओं के लिए बेड तक मुहैया नहीं है। यहां पर एक बेड पर दो से तीन प्रसूताओं को एक साथ रखा जाता है। इससे उनके नवजात बच्चों के बीच संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी रहती है। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को कागजों में तो मेन्यू के अनुसार पौष्टिक आहर दिया जा रहा है, जबकि हकीकत में उनके हिस्से में दो अधपकी रोटी और एक कटोरी पानी से दाल ही आ रही है। इससे उनका स्वास्थ्य ठीक होने के स्थान पर बिगड़ रहा है।
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यहां तो छांव के लिए भटकते तीमारदार
हरदोई। जिला महिला अस्पताल में तीमारदारों के लिए कोई विधिवत व्यवस्था नहीं है। तीमारदारों के लिए एक टीन शेड है, जो प्रसूताओं की संख्या को देखते हुए नाकाफी है। इससे तीमारदार बारिश व धूप में छांव तलाशते रहते हैं। उनको कभी किसी दुकान तो कभी किसी पेड़ का सहारा लेना पड़ता है।
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अस्पताल का वाटर कूलर बना शोपीस
हरदोई। अस्पताल में आने वालों को ठंडा पानी देने के लिए एक वाटर कूलर तो लगा है, पर वह भी सिर्फ शोपीस बन कर रह गया है। उसमें ठंडा पानी तो दूर सामान्य पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती है। इससे तीमारदारों को स्वच्छ पानी के लिए भटकना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में बाहरी लोग रहते हावी
हरदोई। जिला महिला अस्पताल में बाहरी लोगों का दबदबा है। यहां पर जननी सुरक्षा के फार्म भरने से लेकर प्रसव के लिए चिकित्सक से सेटिंग तक बाहरी लोग करते हैं। जिला अस्पताल में निशुल्क फार्म को सशुल्क मुहैया कराया जाता है। यह कार्य जिम्मेदारोें के सामने होता है, पर वह अनजान बने रहते हैं।
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कागजों में दौड़ रही जननी सुरक्षा की गाड़ियां
हरदोई। जिला महिला अस्पताल में जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को लाने ले जाने के लिए वाहन लगे हुए हैं, पर उनका प्रयोग सिर्फ कागजों में ही होता है। प्रसूताएं आ तो 102 वाहन से जाती हैं, पर घर जाने को उनको निजी वाहन का ही प्रयोग करना होता है। घर जाते समय न तो वाहन का पता चलता है और न वाहन चालक का।
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जननी सुरक्षा योजना एक नजर में---
संस्थागत प्रसव-15,782, घरेलू प्रसव-दो, आशा द्वारा सहायतित प्रसव-3,984, प्रसूताओं को निशुल्क भोजन-14,142, निशुल्क घर तक छोड़ने वाली प्रसूताएं-4,667, निशुल्क जांच-29,610
(आंकड़े माह जुलाई तक)
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‘जिला महिला अस्पताल के लिए धनराशि एक साथ मुहैया करा दी जाती है। अगर वहां पर अव्यवस्थाएं हैं, तो अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।’ डा. वीके गुप्ता, सीएमओ