हरदोई। ‘चाह नहीं है सुरवाला के, गहनों में गूथा जाऊं, चाह नहीं प्रेमी माला में, विंध प्यारी को ललचाऊं। मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर तू देना फेंक , मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाते वीर अनेक’। देश को गुलामी की बेड़ियों से निजात दिलाने वाले सपूतों व स्वतंत्रता सेनानियों ने यह पंक्तियां कहकर अपना संकल्प तो पूरा कर दिया, पर खुली आबो हवा में सांस लेने के बाद इस जिले के वासी जरूर शहीदों के बलिदानों को भूल गए। शायद तभी जाने अनजाने ही सही आजादी के 65 साल के बाद भी जिले के स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं को पालीथिन में कै द चौराहों या पार्कों में रखकर उनको अपमानित किया जा रहा या फिर घास फूस व झाड़ियों सहित कई अव्यवस्थाओं की गिरफ्त में रखा गया है।
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अनावरण को तरसी मन्नालाल की प्रतिमा
हरदोई। जिले के स्वतंत्रता सेनानी की पंक्ति में सबसे आगे दिखने वाले रेलवे गंज निवासी पंडित मन्नालाल वैद्य पांडे कई बार जेल गए और पता नहीं कितनी ही यातनाएं सही। सन 1940 में पुलिस की पकड़ न आकर दीवार फांदकर भाग गए और छिपकर सेनानी संगठन में जुट गए। इन्हें अच्छा संगठक कहा जाता था। यह एक निर्भीक सेनानी थे, पर स्वर्गवासी होने के बाद उनकी कई वर्षों के बाद अरुणा पार्क में प्रतिमा तो लगा दी गई, पर उसका अनावरण आज तक नहीं किया गया। उनकी प्रतिमा को आज भी पालीथिन से लपेट और उसमें रस्सी का फंदा डालकर रखा गया है।
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हश्र यह होगा, सेनानी ने सोचा भी न होगा
हरदोई। ग्राम नीर के ठाकुर निरंजन सिंह देव राष्ट्रीय स्तर के सेनानी थे। स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका थी। 1921 के असहयोग आंदोलन से ही संग्राम में जुट गए और जेल गए। 1977 को स्वर्गवास के बाद 1999 को यूपी स्वतंत्रता सेनानी कल्याण परिषद से राशि दी गई, पर स्मारक का हाल क्या है, आपके सामने हैं। अभी तक न तो पत्थर लगा है और न ही अनावरण ही हुआ, बल्कि जिला पंचायत के परिसर में उन्हें वीरान झाड़ियों के बीच रखकर कैद कर दिया गया है।
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बापू की प्रतिमा का सम्मान नहीं हो रहा खिलवाड़
हरदोई। इसे सिर्फ जिले के लोगों का ही दुर्भाग्य कहा जाएगा कि जहां एक ओर पूरे देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी महात्मा गांधी को पूजा जाता है या फिर उन्हें सम्मान दिया जाता है, वहीं जिले के तिकोनिया पार्क में उनकी प्रतिमा लगाकर लोग उनके द्वारा किए गए त्याग व समर्पण को भूल गए। उन्हें फूल तक नसीब नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि पार्क में झाड़ू तभी लगती है, जब कभी किसी पार्टी की बैठक यहां आयोजित हो जाती है। इसके अलावा गंदगी के बीच यह प्रतिमा दो अक्तूबर का ही इंतजार करती नजर आती है। बापू की यह प्रतिमा प्रचार प्रसार के काम आती है। राष्ट्रपिता के साथ यह खिलवाड़ कहां तक सही है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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जिले का कोई चौराहा नहीं गाता संग्राम गाथा
हरदोई। दुर्भाग्य है कि शहर के किसी भी चौराहे पर किसी स्वतंत्रता संग्राम या शहीद की प्रतिमा नहीं लगाई गई, जबकि हर जिले मेें वहां के शहीदों को चौराहों की शान बनाया जाता है। नगरवासियों का कहना है कि इस जिले में चौराहों की शान बनाना तो दूर उन्हें दूर दराज पार्कों में जो जगह दी जाती है, वहां पर सम्मान की जगह उनका अपमान किया जा रहा है।