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भई वाह! बोर्ड की सत्यापन रिपोर्ट फर्जी

Hathras Updated Fri, 28 Jun 2013 05:30 AM IST
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हाथरस। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों से बीटीसी कर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की नौकरी करने वालों के बारे में एक और खुलासा सामने आया है। इस बार फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र यूपी बोर्ड का नहीं, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का है। बोर्ड ने आरटीआई में यह भी बताया है कि जिस सूची के माध्यम से इन अभ्यर्थियों का सत्यापन बताया जा रहा है, वह सूची बोर्ड ने डायट हाथरस को भेजी ही नहीं है, जबकि इस सूची में शामिल इन सभी 08 आवेदकों को बेसिक शिक्षा विभाग सत्यापन पूरा होने के बाद विधिवत रूप से वेतन भी दे रहा है। अब तक यह अभ्यर्थी शिक्षक बनकर सरकारी खजाने से लाखों रुपया तनख्वाह के रूप में ले चुके हैं।
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इस पूरे प्रकरण में आरटीआई में हुए खुलासो के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट हरी सिंह निवासी रमनपुर ने सभी अभिलेखों को जिलाधिकारी को शिकायत के साथ भेजा है, जिसमें आरोप है कि सुरेश सेंगर उर्फ सुरेश कालिया द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में कूट रचित शैक्षिक प्रमाण पत्रों के माध्यम से शिक्षक बनाने का गोरखधंधा किया गया है। उन्होंने शिकायत में कुछ विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों के भी इस गोरखधंधे में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के साथ सबूत के तौर पर आरटीआई में मांगी गई सूचनाओं को संलग्न किया गया है। स्पेशल बीटीसी 2008 में भर्ती 08 शिक्षकों की सत्यापन सूची में शामिल एक शिक्षिका का सीबीएसई का हाईस्कूल का अंक पत्र फर्जी पाया गया है। आरटीआई में हुए खुलासे के मुताबिक हाईस्कूल हिंदी के अंक पत्र में इसके 48 अंक हैं, जबकि बीटीसी में एडमिशन के लिए लगाए गए अंक पत्र में हिंदी में 88 अंक हैं। इसी प्रकार तीन विषयों में फर्जी तरीके से अंक बढ़ाकर बीटीसी की मेरिट में शामिल हुई है। आरटीआई में सीबीएसई बोर्ड ने यह भी जानकारी दी कि उसके द्वारा जो सत्यापन सूची भेजी बताई गई है। वह बोर्ड द्वारा भेजी ही नहीं गई है।
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