हाथरस। शासन हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि महिलाओं को पुरुषों के बराबर बैठने हिस्सेदारीका मौका मिल सके। अब शासन ने मनरेगा के तहत गांवों में चल रहे कामों में महिलाओं की भागीदारी भी निर्धारित कर दी है। इसके तहत मनरेगा मजदूरों की कुल संख्या में 30 फीसदी महिलाओं की सहभागिता अनिवार्य की दी गई। शासन ने हाथरस समेत प्रदेश के सभी जिलों को यह आदेश भेजा है। अब विभाग ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। शासन के आदेश के बाद जिले के अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ गई है। मनरेगा के तहत बजट में 60 फीसदी लेबर चार्ज और 40 फीसदी मैटेरियल को लेकर विभागीय अधिकारियों पर पहले से ही फंदा फंसा रहता था। अब विभागीय अधिकारी महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर परेशान हैं। शासन के आदेश के बाद जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के परियोजना निदेशक ने सभी ब्लॉकों को महिलाओं की भागीदारी 30 फीसदी करने के लिए आदेश भेज दिए हैं। अब शासन को मनरेगा की रिपोर्ट भी इसी आंकडे़ के आधार भेजी जाएगी। मजदूरों की संख्या में विभाग को 30 फीसदी महिलाओं की संख्या दर्शानी होगी। अन्यथा कि स्थिति में मानकों को विपरीत कार्य माना जाएगा। विभाग बजट के साथ-साथ महिलाओं की संख्या के हिसाब से रिपोर्टों को तैयार करने में लगा हुआ है। शासन का इस योजना में महिलाओं को भागीदारी देने के पीछे यह उद्देश्य है कि महिलाओं को पुरुषों की तरह ही अपने गांव में रोजगार मुहैया हो सके। महिलाओं को अपने परिवारों का पालन पोषण करने के लिए अन्य गांवों में जाकर काम न करना पडे़।