हाथरस। जिले में कृषि भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए सरकार की ओर से मृदा स्वास्थ्य योजना शुरू की गई। योजना में जिले के सातों ब्लॉकों को तीन-तीन सौ क्विंटल ढेंचा भेजा जाना था। किसानों को यह ढेंचा 4 रुपये किलो में टोकन मनी से दिया जाना था। जिससे किसान अपने खेतों में ढेंचा की बुवाई कर हरी खाद बनाकर जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकें। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस 2100 क्विंटल ढेंचा को भी तीन हजार रुपये क्विंटल में भरतपुर राजस्थान की मंडी में बेचकर अधिकारियों ने अपना ‘स्वास्थ्य’ बना लिया। जो करीब 63 लाख का होता है।
कृषि विभाग की मृदा स्वास्थ्य योजना कृषि विभाग के अधिकारियों की गलत मानसिकता के चलते हड़प हो गई। इस योजना में किसानों के लिए 10-10 क्विंटल ढेंचा तो प्रदर्शन के लिए निशुल्क वितरित किया जाना था। जबकि 21 क्विंटल ढेंचा सातों ब्लॉकों के किसानों को 4 रुपये किलो के हिसाब से टोकन मनी लेकर वितरित किया जाना था। जिससे किसान अपने खेतों में बरसात के मौसम में ढेंचा की फसल बोकर इस ढेंचा हरी खाद बनाकर फसल की पैदावार बढ़ा सकें। लेकिन जिले में किसानों को वितरित किया जाने वाला यह ढेंचा कृषि विभाग के अधिकारियों ने सांठ-गांठ कर 30 रुपये किलो के भाव में बाजार में बिकवाकर लाखों की अवैध कमाई कर ली। किसानों को उन्नतशील और वैज्ञानिक तरीके से खेती कराने के लिए वर्मी नेडप कंपोस्ट योजना के तहत किसानों को गोबर की खाद बनाने के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जानी थी। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों ने यह धनराशि किसानों को चेक के माध्यम से दिए जाने के बजाय प्रावेधिक सहायकों से सांठ-गांठ कर व्यक्तिगत खातों में भेज दी। जिससे इस धनराशि का विभाग में आराम से बंदर बांट हो गया। जिले में मृदा स्वास्थ्य सुधार योजना और वर्मी नेडप कंपोस्ट योजना में धांधली की शिकायत सपा नेता अजय शर्मा ने जिले के प्रभारी सचिव देवेश चतुर्वेदी से विगत माह भ्रमण पर आने के दौरान भी की थी। इससे पूर्व अपर जिलाधिकारी से हुई शिकायत के बाद अपर जिलाधिकारी अब तक उपजिलाधिकारी हाथरस, सादाबाद, सिकंदराराऊ और सासनी को कई बार निर्देश जारी कर योजना का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक उपजिलाधिकारी इन योजनाओं का भौतिक सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट नहीं दे सके हैं।