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शहर में आधी आबादी की सुविधाओं की अनदेखी

Hathras Updated Sat, 24 May 2014 05:31 AM IST
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हाथरस। महिलाओं की सुविधाओं के लिए भले ही छोटे स्तर से लेकर उच्च स्तर तक प्रशासनिक मशीनरी नई योजनाएं बना रही हो, लेकिन यहां आधी आबादी पर ‘अत्याचार’ हो रहा है। पूरे शहर में कहीं भी महिला प्रसाधन की व्यवस्था नहीं है। और तो और नगर पालिका ने इस तरफ कभी सोचा भी नहीं है। कुछ पुरुष टॉयलेट बचे हैं तो इन टॉयलेटों की हालत भी बेहद जर्जर है और बदबू की वजह से इनका इस्तेमाल करना मुश्किल है।
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आधी आबादी लगातार तरक्की कर रही है। हर स्तर पर उसकी सुविधा का ध्यान रखने के लिए दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस शहर में यह बात बेमानी सी लगती है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि पूरे शहर में कहीं महिलाओं के लिए सार्वजनिक टॉयलेट की व्यवस्था ही नहीं है। पुराने जानकार बताते हैं कि आज से तीन दशक पहले तक शहर के मुख्य चौराहों पर नगर पालिका के अलग-अलग महिला और पुरुष प्रसाधन थे, लेकिन अब महिला प्रसाधन टूट गए हैं या फिर उन पर कब्जे हो गए। शहर में जहां दो-तीन जगह पुरुष टॉयलेट बचे हैं तो वह भी बेहद जर्जर हालत में है। मारे बदबू के वहां आसपास भी बुरा हाल रहता है। उनकी सफाई नहीं होती। इनके आसपास के लोग हमेशा बदबू में जीते हैं। बात यदि सुलभ शौचालय की करें तो कई स्थानों पर सुलभ शौचालयों पर कब्जे हो गए तो कई स्थानों पर किवाड़ ही उखड़ गए। ऐसे में यदि कोई महिला घर से बाजार शॉपिंग करने के लिए जाए तो शहर में महिलाओं के लिए कहीं टॉयलेट ही नहीं है। और तो और इस बारे में सोचा तक नहीं गया है। पालिका बोर्ड की बैठक में कोई प्रस्ताव भी नहीं आया है। यह स्थिति तो तब है, जब यहां की चेयरमैन खुद एक महिला है।
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