हाथरस। जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर स्थित गांव असरोई में दो दिन पहले एक चर्च में आठ परिवारों द्वारा पुन: हिंदू धर्म अपनाए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। मामला सुर्खियों में आने से प्रशासन भी हरकत में आ गया। जिस चर्च को मंदिर का रूप दे दिया गया था, आनन-फानन उसमें लगाए गए देवी-देवताओं के पोस्टर हटा दिए गए। उधर ग्राम प्रधान का कहना है कि यह लोग पहले भी हिंदू थे और अब भी हिंदू हैं। गांव के परिवार रजिस्टर में यह सभी परिवार दलितों के रूप में दर्ज हैं। धर्मांतरण करने वाले परिवारों का कहना है कि ईसाई बनने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए गए थे।
उल्लेखनीय है कि यहां से 8 किमी दूरी पर स्थित गांव असरोई में हिंदूवादियों ने दो दिन पहले एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। यह गांव इगलास तहसील में पड़ता है। वहां बने एक चर्च में हिंदूवादियों ने भगवान के पोस्टर लगा दिए थे। वहां हवन यज्ञ कराया था और वेद मंत्रों के उच्चारण के गांव के आठ परिवारों के करीब 60 लोगों की हिंदू धर्म में वापसी कराई थी। हिंदूवादियों का कहना था कि यह लोग काफी समय से ईसाई थे और इस चर्च में ईसाई धर्म की उपासना करते थे। अब यह मामला काफी चर्चित हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की टीमें लगातार गांव में आ रही हैं और इन परिवार के लोगों से सवाल कर रही हैं। इगलास के एसडीएम भी गुरुवार को वहां गए। उन्होंने भी इन लोगों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और पूछताछ की। मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद चर्च जिसे मंदिर बनाने की घोषणा की गई थी, वहां अब भगवान के पोस्टर नजर नहीं आ रहे। चर्च के बाहर उसकी स्थापना का पत्थर जरूर लगा है। इधर, जिस मिशनरी संस्था ने यह चर्च स्थापित कराया था, उस संस्था का इलाके का काम देख रहे पादरी विकास कुमार ने भी यहां आकर स्थिति देखी और चर्च की सुरक्षा को लेकर ग्राम प्रधान आदि से बात की। उन्हें प्रधान व अन्य लोगोें ने भरोसा दिलाया कि इस भवन में कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।