हाथरस। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अब दूसरी पार्टियों में भी प्रत्याशी चयन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हालांकि तीनों विधानसभा क्षेत्रों में बसपा तो पहले ही अपने मोहरे फिट कर चुकी है। हालांकि बसपाई खेमे में अभी प्रत्याशियों में बदलाव की गुंजाइश से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा, राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस के खेमों में तो अभी तक प्रत्याशियों की तस्वीर धुंधली ही नजर आ रही है, अलबत्ता इन पार्टियों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी यह उत्सुकता जरूर है कि आखिर किन चेहरों पर उनकी पार्टियां चुनावी दांव लगाएंगी। इन पार्टियों में टिकट के दावेदारों ने लखनऊ-दिल्ली की भागदौड़ अभी से शुरू कर दी है। उनकी कोशिश है कि चुनाव से पहले ही प्रत्याशी की घोषणा हो जाए, ताकि उन्हें जनता के बीच पैठ बनाने के लिए पूरा वक्त मिल जाए और वह चुनावी समर में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा सकें। हालांकि इन पार्टियों के आला नेतृत्व से अभी तक प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर कोई सकारात्मक संदेश नहीं मिला है, लेकिन पार्टियों के सूत्र बताते हैं कि संगठन स्तर पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हो सकता है कि सपा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद इसमें और तेजी आ जाए।
बसपा में अभी बदलाव की गुंजाइश
बात बसपा की करें तो यह प्रत्याशियों के चयन के मामले में सपा से भी आगे रही है। पिछली बार सिकंदराराऊ से मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय, सादाबाद से उनके बहनोई सतेंद्र शर्मा चुनाव लड़े थे, जबकि हाथरस विधानसभा से गेंदालाल चौधरी पार्टी के विधायक हैं। हालांकि अभी तक पार्टी में इन तीनों को ही भावी प्रत्याशी मानकर चला जा रहा है, लेकिन भविष्य की सियासी परिस्थितियों के हिसाब से प्रत्याशियों में बदलाव की चर्चाएं भी पार्टी हलकों में जोरों पर हैं। पूरा दारोमदार इस बात पर है कि पूर्व मंत्री सिकंदराराऊ विधानसभा से ही दोबारा किस्मत आजमाएंगे या फिर सादाबाद विधानसभा को चुनेंगे। बसपा के अंदर उठ रहे इन सवालों के जवाब भी बहुत जल्द मिलने की उम्मीद है।
रालोद का भविष्य गठबंधन पर निर्भर
राष्ट्रीय लोकदल का यूं तो जिले के हाथरस और सादाबाद विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभाव है। उसके लिए इन दोनों सीटों पर प्रत्याशी चयन करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। हालांकि जिस तरह प्रदेश स्तर पर जदयू, रालोद, आरजेडी के महागठबंधन की रणनीति बन रही है, उससे रालोद को अभी प्रत्याशी घोषित करने में वक्त लग सकता है। जब तक गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं होगी, तब तक खुद रालोद नेता यह बताने की भी स्थिति में नहीं हैं कि पार्टी जिले की किन सीटों पर किस्मत आजमाएगी।
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कांग्रेस में भी चेहरे चमकाने लगे दावेदार
कांग्रेस में भी प्रत्याशी चयन की हलचल चल रही हैं। तीनों विधानसभा सीटों पर पार्टी का टिकट पाने वाले सक्रिय हो गए हैं। इन दावेदारों ने जिले के नेताओं की मदद से दिल्ली, लखनऊ की दौड़ लगानी शुरू कर दी है। पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी हिस्सेदारी भी बढ़ गई है। हर दावेदार खुद को पार्टी के कार्यक्रमों में इस तरह पेश कर रहा है कि मानो नेतृत्व से उन्हें चुनाव लड़ने की हरी झंडी मिल गई हो। गौरतलब है कि पार्टी के पर्यवेक्षक भी कुछ समय पहले यहां आकर प्रत्याशी चयन के लिए कार्यकर्ताओं से मंत्रणा भी करके जा चुके हैं।
भाजपा में दावेदारों की लंबी लाइन
भारतीय जनता पार्टी में दावेदारों की लंबी लाइन है। तीनों विधानसभा सीटों पर कई बड़े सियासी दिग्गजों की ख्वाहिश इस पार्टी का टिकट हासिल करने की है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इस बार भी ऐनवक्त पर चौंकाने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेता कुछ दूसरे दलों के उन चेहरों के संपर्क में हैं, जोकि जिले की सियासत के चुनावी खिलाड़ी कहे जाते हैं। पार्टी उन पर दांव लगाने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ पुराने चेहरे भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और लंबी सेवाओं का हवाला देकर टिकट पर दावा ठोक रहे हैं। यह नेता दिल्ली-लखनऊ में अपने सियासी आकाओं की मदद से अपने दावे को मजबूती देने की कोशिश में जुटे हैं। आने वाले दिनों में टिकट की यह कश्मकश और तेज होने के आसार हैं।
पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रत्याशी चयन का नेतृत्व प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को करना है। हमसे जो सूचनाएं मांगी जा रही हैं, वह नेतृत्व को भिजवाई जा रही हैं। पार्टी कोई भी निर्णय सहयोगी दलों से सलाह-मशविरा के बाद ही करेगी।
-रामवीर सिंह परमार, जिलाध्यक्ष भाजपा
पार्टी का चुनाव मैनेजमेंट संभाल रहे प्रशांत किशोर ने सभी जिला और शहराध्यक्षों से 14-15 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। पहले यह रिपोर्ट वहां भेजी जाएगी। आरक्षित क्षेत्रों के लिए पार्टी की एक यात्रा भी आ रही है। वहां से निर्देश मिलने पर ही आगे की कार्यवाही शुरू होगी।
-करुणेश मोहन दीक्षित, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
पार्टी में प्रत्याशी चयन का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष के हाथ में है। हाथरस और सिकंदराराऊ में पार्टी के सिटिंग विधायक हैं। केवल एक सादाबाद सीट पर अंतिम निर्णय होना है। यहां के लिए पार्टी अध्यक्ष जो भी आदेश देंगी, उसका पालन होगा।
-दिनेश देशमुख जिलाध्यक्ष बसपा
सादाबाद सीट से पार्टी पूरे दम से चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी दोनों सीटों पर भविष्य में विचार-विमर्श होगा। अप्रैल में मथुरा में होने वाले राष्ट्रीय महाधिवेशन में रालोद समेत कई दलों के गठबंधन का खाका तैयार होगा। उसके बाद प्रत्याशियों पर अंतिम निर्णय होगा।
-रमेश सिंह ठेनुआं, जिलाध्यक्ष रालोद