जौनपुर की प्रमुख नदियों में शुमार सई के पानी की धारा ठहर गई। उसमें रेत उड़ रही है। जगह-जगह गड्ढों में पानी जरूर बचा है पर वह इतना काला पड़ गया है कि उसे मवेशी भी नहीं पी रहे हैं। इससे इससे जानवरों के समक्ष पानी का संकट खड़ा हो गया है।
तपिश ऐसे ही बरकरार रही और बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में संकट और भी गहरा सकता है। हरदोई से निकली सई नदी जिले में प्रतापगढ़ की सीमा से लगे सुजानगंज ब्लाक के बाल्हामऊ गांव से प्रवेश करती है।
सुजानगंज के विभिन्न गांवों से होते हुए बक्शा, सिकरारा, मड़ियाहूं, सिरकोनी और जलालपुर के कई गांवों से होते हुए जलालपुर ब्लाक के राजेपुर के पास गोमती नदी में मिल जाती है। जौनपुर की सीमा में यह नदी करीब 70 किलोमीटर का सफर तय करती है।
जीवन दायिनी मानी जाने वाली सई की धारा ठहर गई है। पानी सूखने से अब नदी में रेत उड़ रही है। कई स्थानों पर तो लोग साइकल और पैदल भी नदी को पार कर रहे हैं। जहां तहां पानी है तो वह गड्ढे में जमा है और वह काला पड़ गया है।
नदी के किनारे जंगली और पालतू जानवरों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। नदी में जहां तहां पानी जमा है उसे मवेशी भी नहीं पी रहे हैं। नदी सूखने से आस पास के हैंडपंप भी पानी छोड़ रहे हैं। कुएं और तालाब तो पहले ही सूख चुके हैं।
ऐसे में नदी के किनारे के लोगों के समक्ष एक गंभीर संकट खड़ा हो रहा है। सिकरारा क्षेत्र में नदी के किनारे रहने वाले लालबहादुर यादव कहते हैं कि पानी सूखने से सबसे अधिक समस्या मवेशियों के लिए हो गई है। भैंस व अन्य जानवरों को लोग नदी में ही नहलाते थे।
घर से छूटने के बाद मवेशी पहले दौड़कर नदी में ही जाते थे जहां अपनी प्यास बुझाने के साथ वे देर तक पानी में ही रहकर गर्मी से राहत पाते थे। लेकिन पहले जहां पानी बहता था और उसमें नाव चलती थी वहां रेत उड़ रही है और लोग पैदल और साइकल से नदी पार कर रहे हैं।