कानपुर। विश्व बैंक की टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्युप) 2013 का एचबीटीआई में बुरा हाल है। टीचर एक दूसरे से विवाद में उलझे हैं। इस कारण ऑयल टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में अप्लाइड रिसर्च ट्रेनिंग एजूकेशन इन लिपिड साइंस का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नहीं खोला जा सका है।
सेंटर आफ एक्सीलेंस के लिए 16 अप्रैल को दो करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है, फिर भी मामला जस का तस है। इसके कोआर्डिनेटर की नियुक्ति में भी गड़बड़ी हुई है। नियमानुसार डिपार्टमेंट के एचओडी को कोआर्डिनेटर बनाया जाना चाहिए, लेकिन एक्स एचओडी प्रो. आरपी सिंह को कोआर्डिनेटर बनाकर मामले को विवादित कर दिया गया। अब मामले की छानबीन को लेकर प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा नीरज गुप्ता को पत्र लिखा गया है। सेंटर आफ एक्सीलेंस के लिए विश्व बैंक ने पांच करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। एचओडी प्रो. आरके त्रिवेदी ने बताया कि यूपी में एचबीटीआई अकेला ऐसा संस्थान है, जिसे कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं नेशनल प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (एनपीओ) से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का तमगा मिला है। इसके तहत ऑयल टेक्नोलॉजी में एमटेक, पीएचडी की पढ़ाई शुरू कराई जानी थी। इंडस्ट्री से समझौता करके दुनिया भर के रिसर्च को आपस में जोड़ने की योजना थी लेकिन व्यक्तिगत स्वार्थ की वजह से एचबीटीआई प्रशासन ने मामले को विवादित कर दिया। अब 2013-14 में एमटेक, पीएचडी की पढ़ाई, रिसर्च नहीं कराई जा सकेगी। यह प्रोजेक्ट तीन साल का है। एक साल बर्बाद हो चुका है। समय पर प्रोजेक्ट नहीं पूरा हुआ तो एचबीटीआई की साख पर बट्टा लगेगा। बजट भी चला जाएगा। हालांकि डायरेक्टर प्रो. जेएसपी राय ने कोआर्डिनेटर की नियुक्ति को जायज ठहराया है। पत्र लिखने वाले प्रो. आरके त्रिवेदी को ज्यादा पत्राचार से बचने की सलाह भी डायरेक्टर ने दी है।