दोआबा के भांग कारोबारियों को अबकी साल दो लाख रुपये की भांग बेचकर दो करोड़ रुपया सरकारी खजाने में भरना पड़ेगा। यह आफत कारोबारियों ने बढ़-चढ़कर बोली बोलकर खुद मोल ली है। अब इतनी मोटी रकम की भरपाई वह कैसे करेंगे ? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
जिले में भांग की कुल 42 दुकानें हैं। बुधवार को इन दुकानों की नीलामी करवाई गई। एक करोड़ 98 लाख 63 हजार चार सौ रुपये में सभी दुकानें नीलाम हुईं। जिला आबकारी अधिकारी बीपी मनिक ने बताया कि जनपद की दुकानों में 600 किलो भांग साल भर में बेचे जाने का कोटा निर्धारित है। एक किलो भांग का सरकारी रेट 33 रुपये है। इस हिसाब से 66 सौ किलो भांग दो लाख 17 हजार आठ सौ रुपये की होगी। अब सवाल यह उठता है कि जब कारोबारी कुल दो लाख 17 हजार आठ सौ रुपये की भांग बेचेेंगे तो एक करोड़ 98 लाख 63 हजार चार सौ रुपये वह कहां से लाकर सरकारी खजाने में भरेंगे।
साफ है कि दुकानदार कुछ न कुछ गड़बड़ जरुर करेंगे। वैसे यहां भांग की दुकानों में गांजे की बिक्री खुलेआम होती है। कुछ कारोबारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गांजा बेचकर ही रकम वसूल की जाएगी। उधर, विभागीय अफसर सरकार का भरता खजाना देख गदगद हैं। उन्हें इस बात की जरा भी फिक्र नहीं है कि कारोबारी अपनी रकम निकालने के लिए युवा पीढ़ी को किस तरह से नशे का आदी बनाएंगे।
नीलामी की रकम अधिक होने की वजह से जिले की कई दुकानें बीच में ही बंद हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि कारोबारी पहले तो उल्टा-सीधा कुछ भी करके रकम निकालने का प्रयास करेंगे। कामयाब नहीं हुए तो दुकान सरेंडर कर देंगे। इसकी वजह से आबकारी विभाग को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बड़े कारोबारी पहले भी ऐसा खतरा मोल ले चुके हैं। उनके फेल होने के आसार कम ही हैं।
बड़ी दुकानों को दो सौ तो छोटी दुकानों को 100 से 150 किलो तक भांग बेचने के लिए दी जाएगी। क्योंकि छोटी-बड़ी दुकानों के हिसाब से कोटा निर्धारित है। कोई भी दुकानदार भांग बेचकर दुकान की रकम अदा करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में साफ है कि वह गलत रास्ता अपनाएगा।