बसपा हाई कमान द्वारा विधान सभा सिराथू सीट पर बाहरी प्रत्याशी थोपे जाने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा हो गई है। छह जून को प्रत्याशी सईदुर रब के नाम की घोषणा के वक्त कार्यकर्ताओं ने बवाल किया था, उससे सईदुर रब के विधायक बनने का ख्वाब टूट सकता है। पार्टी हाईकमान ने मामले में पूर्व जिला प्रभारी को निष्कासित कर दिया है। ऐसे में प्रत्याशी सईदुर रब के तगड़े विरोध के आसार बन गए हैं। जिस तरह से विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। वह अभी बानगी मात्र है। सियासी गलियारे में चर्चा है कि स्थानीय कार्यकर्ताओें की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा गया तो पार्टी को क्षति उठानी पड़ सकती है
पार्टी हाई कमान ने इस सीट पर स्थानीय दावेदारों को दर किनार कर बाहर से आए सईदुर रब को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके संघर्ष का फल बाहर से आकर कोई खाए। वे लोग इसे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। पार्टी हाई कमान को कार्यकर्ताओं की भावनाआें का ख्याल रखना होगा। स्थानीय बसपाई जिस तरह से विद्रोह के मूड में है। उससे लगता है कि पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी की राह आसान नहीं होगी। उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं का सर्मथन नहीं हासिल होगा तो चुनाव किसके दम पर लड़ेंगे।
बसपा हाई कमान के जरिए सिराथू सीट पर प्रत्याशी बनकर आए सईदुर रब की राह में कांटे ही कांटे बिछने शुरू हो गए हैं। मैदान में पैर जमाने से पूर्व सईदुर के सामने स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के विश्वास को जीतने की चुनौती आ गई है। अब देखना है कि सईदुर इसमें कहां तक कामयाब हो पाते हैं।
बसपा की सियासत करने वाले ये अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी पार्टी में मायावती के अलावा किसी का सिक्का नहीं चलता है। जिसने बगावत की उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। यही कारण है कि क्षेत्र में प्रत्याशी सईदुर का विरोध करने वाले ऐसे नेता भी हैं, जो खामोश रहकर आस्तीन में सांप का रोल निभा रहे हैं। वे परदे के पीछे रह पार्टी की जड़ में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैं।