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टैंकर के भरोसे 25 हजार आबादी

अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर Updated Fri, 08 Apr 2016 01:27 AM IST
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पेयजल समस्‍याा - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। सूखा का सीधा असर शहर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ने लगा है। शहर के जिन मुहल्लों की पेयजल व्यवस्था केवल हैंडपंप पर निर्भर है, वहां का भू-जल स्तर गिरने के कारण पेयजल का संकट गहरा गया है। प्रभावित इलाकों की जनता पेयजल के लिए तकरीबन पूरी तरह से जल संस्थान के टैंकरों पर निर्भर हो गई है, लेकिन जल संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे पानी के टैंकर ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि करीब 25 हजार की आबादी टैंकर के भरोसे पानी पी रही है।
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शहर में पानी की कमी चल रही है। अपर जोन व पठारी इलाकों में बसे मुहल्लों में नेहरू नगर के वार्ड नंबर 04 व 06 में पेयजल संकट गहरा गया है। मुहल्ले में पेयजल के लिए पाइप लाइन की सुविधा नहीं है, जिससे लोग हैंडपंप पर निर्भर हैं। लेकिन, जमीन से पानी सूखने के कारण हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। कुछ हैंडपंपों को छोड़कर बाकी सभी हैंडपंप बंद पड़े हैं। प्रभावित इलाकों में जल संस्थान द्वारा एक-दो पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो लोगों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जल संस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रत्येक दिन मुहल्ला नेहरू नगर के दोनों वार्डों में दो-दो टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिन इलाकों के नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां लोगों की मांग पर टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

नेहरू नगर की जनता परेशान
सूखा का सबसे ज्यादा असर मुहल्ला नेहरू नगर क्षेत्र में हुआ है। नेहरू नगर शहर का सबसे बड़ा व सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र है। नेहरू नगर को दो वार्डों 04 व 06 में बांटा गया है। कुल जनसंख्या 25 हजार के आसपास है। पूरा इलाका शहर के अपर जोन में बसा है और अधिकतर भूभाग पठारी व पथरीला है। गर्मियों के मौसम में यहां पर पेयजल की समस्या गहरा जाती है, लेकिन इस वर्ष गर्मी के मौसम की शुरुआत से ही हालात काफी बिगड़ गए हैं। यहां पर दो सैंकड़ा से अधिक हैंडपंप लगे है, जिनमें से आधे से ज्यादा हैंडपंप ड्राई हो गए हैं और कुछ खराब पड़े हुए हैं। हैरानी की बात है कि यहां के कुछ इलाकों की जमीन में 500 फुट की गहराई तक पानी नहीं है। देवगढ़ रोड पर मुहल्ला नेहरू नगर क्षेत्र में रहने वाले कीरत यादव ने प्राइवेट बोर कराया था, लेकिन 500 फुट से अधिक गहराई तक धूल के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। इसी तरह कई स्थानों पर प्राइवेट बोर में 200 फुट गहराई तक पानी नहीं निकल रहा है। इलाके में पेयजल पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं होने के कारण हैंडपंप पर निर्भर जनता पानी के त्राहि कर रही है। जल संस्थान द्वारा प्रतिदिन दोनों वार्डों में 4,500 लीटर की छमता वाले दो टैंकर नेहरू नगर में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हजारों लोगों के बीच इतना पानी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। यदि प्रशासन की ओर से जल्द ही कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आगामी भीषण गर्मी के समय हालात बेकाबू हो जाएंगे।
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पानी खरीदने पर मजबूर कर दिया हालातों ने
मुहल्ला नेहरू नगर में 60 प्रतिशत से अधिक जनता मजदूर व गरीब वर्ग की है। लोग कहते हैं कि खाना नसीब नहीं हो तो पानी से पेट भर लेते है, लेकिन यहां की जनता के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है। आर्थिक तंगी में जीवन यापन करने वाले लोगों को पानी की किल्लत ने पानी खरीदने को मजबूर कर दिया है। पानी के लिए परेशान लोग 500 से 600 रुपए में पानी का टैंकर खरीद रहे हैं। एक युवक ने अपने घर में हैवी बोर कराया है और वह अपने टैंकरों में पानी भरकर बेचता है।

नहीं बन पा रही टंकी
मुहल्ला नेहरू नगर के लोग पिछले काफी समय से पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय लोगों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी ने शासन के समक्ष करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से नेहरु नगर की पेयजल योजना का प्रस्ताव रखा था। इस दौरान शासन से लगभग संस्तुति भी मिल गई थी, लेकिन जब जल संस्थान ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर भेजी तो शासन ने उसको निरस्त कर वापस भेज दिया और जल निगम को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। करीब एक वर्ष का समय बीतने के बाद भी जल निगम अभी तक शासन को प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर नहीं भेज पाया है। इसके पीछे विभागीय अधिकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने कीर बात कहते हैं।

फिर से बन रही प्रोजेक्ट रिपोर्ट
शासन के निर्देश पर जल निगम ने पिछले सप्ताह करीब 28 करोड़ रुपए लागत की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर भेजा था। शासन ने इसे बहुत अधिक बताते हुए वापस कर दिया। अब जल निगम 21 करोड़ रुपए के भीतर ही दूूसरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रहा है।टैँकर से हो रही जलापूर्ति
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शासन ने स्वीकृत बजट के भीतर ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी है, जिसे तैयार किया जा रहा है और जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। पुरानी रिपोर्ट में मुहल्ला नेहरु नगर की दूरी को देखते हुए दो सीडब्लूआर बनाने की योजना थी, लेकिन बजट को ध्यान में रखते हुए अब नई प्रोजेक्ट रिपोर्ट से इसको हटा दिया जाएगा। पानी की टंकी के लिए जगह भी चिह्नित कर ली गई है, शासन से स्वीकृति मिलते ही योजना धरातल पर आ जाएगी।
- एएस कटियार
परियोजना प्रबंधक
जल निगम निर्माण इकाई
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ग्रेनाइट खदान से हो सकती है जलापूर्ति
नेहरु नगर से कुछ दूरी पर एक ग्रेनाइट की खदान है। इस खदान की गहराई 500 फुट से अधिक है और क्षेत्रफल भी काफी अधिक है। खदान में काफी पानी भरा होने के कारण अब वहां काम बंद हो गया है। इस खदान में इतना पानी है कि नेहरु नगर में पर्याप्त जलापूर्ति हो सकती है। साथ ही वाटर फिल्टर प्लांट लगाकर पानी को स्वच्छ कर उपयोग में लाया जा सकता है। खदान से नेहरु नगर तक पाइप लाइन बिछाने में खर्च भी कम होगा और ढलान होने के कारण पानी की सप्लाई देने में कठिनाई नहीं होगी। गोविंद सागर बांध में वैसे भी पानी की कमी हो गई है। नेहरु नगर को इस खदान से जलापूर्ती करने के बांध में पानी की समस्या नहीं होगी।

जल संस्थान द्वारा प्रतिदिन दो पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आबादी के अनुसार कम से कम प्रतिदिन सुबह व शाम 10-10 टैंकरों की आवश्यकता है। यहां के कई इलाके हैं, जहां एक भी बार टैंकर उपलब्ध नहीं कराया गया।
- विवेक दरौनियां
पार्षद वार्ड नंबर 06

 
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